सरहद पार मन की दूरियां मिटाने को जुटे भारत नेपाल के कलमकार, रिश्तों की मिठास बचाने की हुई पहल

भारत और नेपाल एक ऐसे पड़ोसी देश हैं जिनकी संस्कृति और इतिहास में एकरूपता और अपनापन की खुशबू रचती- बसती रही है। राम जानकी से लेकर बुद्ध तक की आध्यात्मिक यात्रा का सफर हो या फिर शादी ब्याह के रिश्ते। दोनों देशों में संबंधो की प्रगाढ़ता सदियों से चलती रही है। बदलते ज़माने के साथ इस मजबूत रिश्तों में थोड़ी थोड़ी सुस्ती दिखने लगी। खुले सरहदों पर घेरा लगाने की बातें उठने लगी। ऐसा आभास होने लगा कि भरसे की इस मजबूत नींव को कहीं कमजोर करने की कोशिश तो नहीं। अगर ऐसा है तो इसकी वजह क्या है? कैसे ये दोनों देश संस्कृतियों के साथ मन के रिश्तों को भी निश्छल, निर्विकार बना पाए? कैसे भरोसे की मीठी मीठी खुशबू दोनों देशों के लोगों की दिल में महक कर गा उठे ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे…
इन्हीं सवालों का जबाब ढूंढने नेपाल की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले वीरगंज में जुटे दोनों देशों के कलमकार। बातें हुई, चर्चा हुई, और बनी साझा रणनीति की कैसे कलम की ताकत से नफरती ताकतों को खत्म कर प्यार और भरोसे की फीजा इस देश से उस देश तक बहती रहे। इस पहल को नाम दिया गया Nepal -India cross Border media conclave- 2025 । क्या कुछ हुआ कलमकारों के इस जुटान में पढ़िए…

नेपाल के वीरगंज में भारत-नेपाल पत्रकार संगठन “मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी” के बैनर तले नेपाल-इंडिया क्रॉस बॉर्डर मीडिया कॉन्क्लेव-2025 का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में नेपाल और भारत के सैकड़ों पत्रकारों ने शिरकत करते हुए दोनों देशों के संबंध को मजबूत करने में मीडिया की भूमिका पर लंबी चर्चा की । भारत से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए, वहीं नेपाल के विभिन्न प्रांतों से भी बड़ी संख्या में पत्रकार पहुंचे।

भारत-नेपाल सीमा पर कभी बैरियर नहीं बनेगा’

नेपाल-इंडिया क्रॉस बॉर्डर मीडिया कॉनक्लेव 2025 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए नेपाल सरकार के खाने पानी मंत्री प्रदीप यादव ने कहा कि भारत में शायद ही कोई बड़ी या छोटी घटना घटती हो जिसमें नेपाली नागरिक प्रभावित न हों। इसका प्रमुख कारण यह है कि बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारत में रहते हैं। कोई रोजगार के लिए, कोई व्यवसाय के लिए तो कोई शिक्षा के लिए। यही सदियों से दोनों देशों के बीच अटूट रिश्ते का आधार है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और सिक्किम के कई हिस्सों का नेपाल से ऐतिहासिक संबंध है। इसलिए भारत और नेपाल के रिश्ते को ‘रोटी-बेटी का संबंध’ कहा जाता है। बार-बार मांग उठने के बावजूद हमने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि भारत-नेपाल सीमा पर कभी बैरियर नहीं बनेगा। दोनों देशों के बीच केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि वैवाहिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध भी हैं। इन रिश्तों को आगे भी मजबूत बनाए रखने में आप पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रमों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। ऐसे कार्यक्रम चलते रहने चाहिए ताकि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग और भी प्रगाढ़ हो सके।

खुला बॉर्डर पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल’ 

नेपाल सरकार के विधि‌‌ मंत्री अजय कुमार चौरसिया ने कहा कि “भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का अटूट संबंध है, जिसे कोई भी तोड़ नहीं सकता। दोनों देशों के बीच खुला बॉर्डर पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल है। विश्व में ऐसा संबंध भारत और नेपाल को छोड़कर किसी और देश में नहीं देखने को मिलता।”
कॉनक्लेव में वक्ताओं ने मीडिया की भूमिका को सीमा पार भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करने में अहम बताया। साथ ही यह भी कहा गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं व संभावनाओं को रचनात्मक पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाना, भारत-नेपाल रिश्तों को और गहराई देगा।

जिम्मेदारी का निर्वाह जरूरी

इस सभा के प्रथम सत्र में विषय प्रवेश कराते हुए मीडिया फार बॉर्डर हार्मनी के संस्थापक वरिष्ठ पत्रकार अमरेन्द्र तिवारी ने दोनों देशों में मीडिया की खबरों से बनते- बिगड़ते रिश्तों पर चर्चा करते हुए पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करने और रिश्तों की प्रगाढ़ता का ख्याल रखने की बात कही।

विश्वसनीयता बनाएं रखना सबसे अहम 

भारत के पटना से आए thebigpost.com के संस्थापक और दूरदर्शन बिहार के वरिष्ठ एंकर विवेक चंद्र ने कहा कि आज की पत्रकारिता का स्वरूप काफी बदल गया है। सूचना क्रांति और लाइक , व्यूज और सब्सक्राइबर वाले इस युग में खबरों की विश्वसनीयता बनाएं रखना सबसे अहम है। सरहद की खबरे को प्रसारित प्रकाशित करने से पहले उनकी सत्यता की पड़ताल सबसे जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि पाठकों पर आधारित सब्सक्राइब मार्डल अपनाकर पत्रकारिकता में विज्ञापनदाता के अनावश्यक दबाव से मुक्ति संभव है पर इसके लिए पाठकों को भी आगे आना होगा।

‘ज्यादा हो ग्राउंड रिपोर्ट ‘
कार्यक्रम के आयोजक मंडल में शामिल नेपाल के पत्रकार अनिल तिवारी जी ने कहा कि हम पर लोगों का विश्वास टिक है हमें इस विश्वास को मजबूत करने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट को ज्यादा से ज्यादा करने की जरूरत है। उन्होंने इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए दोनों देशों के पत्रकारों को धन्यवाद दिया।

मशीनी पत्रकारिता की जगह मानवीय पत्रकारिता ‘

राष्ट्रीय समाचार समिति नेपाल सरकार के अध्यक्ष धर्मेंद्र झा ने चर्चा के दौरान आए निष्कर्ष को बताते हुए एआई युग में मशीनी पत्रकारिता की जगह मानवीय पत्रकारिता की पहल करने की सलाह दी।
वहीं भारत के पत्रकार विजय झा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए आज की जरूरत है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए मीडिया फार बॉर्डर हार्मनी के सदस्यों की सराहना करते हुए इसे सद्भाव बढ़ाने वाला बताया।

कार्यक्रम में नेपाल के स्थानीय प्रदेश सांसद श्याम पटेल, , नैनीताल उत्तराखंड से टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार सोनाली मिश्र, देहरादून, उत्तराखंड से अमर उजाला के पत्रकार करण जी, प्रेस काउंसिल नेपाल की सदस्य रिंकू झा, नेपाल के पूर्व राजदूत विजयकांत कर्ण, प्रतीक दैनिक के संपादक जगदीश शर्मा, पत्रकार महासंघ नेपाल के अध्यक्ष अशोक तिवारी आदि ने भी संबोधित किया। मंच संचालन मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी नेपाल के राष्ट्रीय महासचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार रितेश त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में दोनों देशों के पत्रकारों ने समस्याओं पर भी खुलकर चर्चा की और एक साझा रणनीति भी बनाई और लिया एक संकल्प कि

सुपर फास्ट पत्रकारिता के जमाने में भी खबरों की बोर्ड पर टाइप होने से पहले सत्यता की कसौटी पर कसी जाए। खबरों में सनसनी का चटखारा नहीं दोनों देशों के जन- मन का ख्याल हो जिससे बची और बसी रहे दोनों देशों के बीच संबंधों वह मिठास जो सदियों से सरहद नहीं मन के रिश्तों को मजबूत करती आई है।

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