Home Blog Page 6

इस  गांव में बेटियों के नाम से रौशन हैं दरवाज़े, पढ़ें अनोखे गांव तिरिंग की कहानी

आज कहानी झारखंड के एक वैसे गांव की जहां घर की मिल्कियत बेटियों के नाम होती है। इस गांव में हर घर के दरवाजे पर घर की बेटियों के नाम का बोर्ड लगा मिलेगा। आमतौर पर जहां घर के मुखिया का नाम लोग मकान के बाहर लगे नेम प्लेट पर लिखवाते हैं पर झारखंड के इस गांव में घर की बेटियों के नाम नेमप्लेट पर लिखवाने की परंपरा चल रही है। क्यों और कैसे शुरू हुई ये परंपरा और क्या है इसका मकसद पढ़िए झारखंड का आदिवासी बहुल छोटे से गांव तिरिंग की अनोखी कहानी।

छोटे- छोटे मकान । ज्यादातर मिट्टी की कच्ची दीवारों वाले घर । दीवारों पर चटख रंग, फूल पत्ते और बेल-बूटे की पेंटिंग ‌।
साफ सुथरी और लीपी हुई देहरी। हर घर के मुख्य दरवाजे के उपर एक बड़ा बोर्ड जिसपर शान से लिखा है घर की बेटियों का नाम और उसके नीचे उनकी मां का।
झारखंड का साधारण सा दिखने वाला गांव तिरिंग वास्तव में असाधारण सोच और जज्बे से लैस है। यह गांव आज देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। यहां हर घर के दरवाजे पर बेटियों के नाम लिखे नेम प्लेट दिख जाएंगे।

दरअसल यहां हर घर के बाहर गृह मुखिया के तौर पर बेटियों के नाम बड़े बड़े अक्षरों वाले बोर्ड पर लिखे जाते हैं। इसके पीछे का मकसद बेटियों को
न केवल पहचान और समाज में सम्मान दिलाना हैं बल्कि उनके अधिकारों और महत्व को भी मजबूत करना हैं। इस गांव का टैग लाइन ही है “मेरी बेटी मेरी पहचान”।

ऐसे शुरू हुआ यह खास अभियान

गांव वालों के अनुसार गांव में आदिवासियों के कुल 161 घर है। घरों पर बेटियों के नाम लिखने की परंपरा तब शुरू हुई जब इस गांव की जनसंख्या में लड़कियों का लिंगानुपात लड़कों की अपेक्षा कम होने लगा। तब साल 2016 में जिले के तात्कालिक डीसी संजय पाण्डेय ने इस खास पहल की शुरुआत। इसके लिए गांव वालों और सामाजिक संगठनों से बात कर इस अभियान के लिए राजी किया गया।


गांव की आंगनबाड़ी सहायिका सुलोचना कहती है

“आदिवासी समाज में वैसे तो बेटियों और बेटों के बीच भेदभाव नहीं किया जाता है पर इस गांव में बेटियों की घटती तादाद चिंतित करने वाली थी। जब तात्कालिक डीसी ने इस गांव को मेरी बेटी मेरी पहचान अभियान के लिए चुना तो गांव वालों ने इसमें बढ़-चढ़कर कर हिस्सा लिया। अब यह इस गांव की परंपरा बन गई है। इसका असर भी दिखता है। यहां की हर बेटियां स्कूल जाती है और पढ़ लिख रही हैं।”

गांव की बेटी उषा रानी सरकार कहती हैं।

मैं जब भी दरवाजे पर लगा अपने नाम का नेमप्लेट देखती हूं मेरा आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। यह हमें मजबूती देता है और एक जिम्मेदार नागरिक बने रहने की चुनौती भी। “

लौह नगरी जमशेदपुर से इतनी दूर है तिरिंग

तिरिंग गांव झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित है और लौह नगरी जमशेदपुर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गांव मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है,यही यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है।

हालांकि, यहां की अर्थव्यवस्था अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत मजबूत नहीं लेकिन , लेकिन शिक्षा और सामाजिक सुधारों के चलते यह गांव तेजी से प्रगति की इबारत लिख रहा है।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का सजीव उदाहरण

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को जहां सरकार और सामाजिक संस्थाएं बढ़ावा दे रही हैं, वहीं तिरिंग गांव ने मेरी बेटी मेरी पहचान को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। यहां के लोग यह मानते हैं कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं और उन्हें भी समान अवसर मिलने चाहिए। दरवाजों पर बेटियों के नाम लिखने की यह पहल इस सोच को और मजबूत करती है।

हर फैसले में भी बेटियों की राय

इस परंपरा ने गांव में बेटियों के प्रति सोच को बदला है। अब यहां माता-पिता गर्व से न सिर्फ अपनी बेटियों के नाम अपने घर के मुख्य द्वार पर लिखवाते हैं। बल्कि हर प्रमुख फैसलों में भी बेटियों की राय भी लेते हैं।

उदार होता है आदिवासी समाज

इस गांव का कई बार दौरा कर चुके झारखंड के युवा पत्रकार समीर कहते हैं

“आदिवासी समाज में महिलाओं के प्रति स्वतंत्रता और समानता का नजरिया प्राचीन काल से ही है। यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है। दूसरी बात यह कि यहां के लोग किसी भी बात का दिखावा नहीं करते वो आपके साथ दिल से जुड़ते हैं। यही वजह है कि जब तात्कालिक जिला प्रशासन ने इस गांव में मेरी बेटी मेरी पहचान अभियान की शुरुआत की तो तिरिंग गांव के लोग इस अभियान के साथ न सिर्फ पूरे मन से जुड़े बल्कि इसे एक परंपरा का रूप ही दे दिया। मुझे लगता है यह आदिवासी समाज में ही संभव है और यह आदिवासी समाज की खुबसूरती भी है जहां कोई दिखावा नहीं होता। “

 

फैल रही शिक्षा और समानता की रोशनी

इस पहल का सबसे सकारात्मक प्रभाव शिक्षा के क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। गांव में लड़कियों की स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई है और उच्च शिक्षा के प्रति जागरूकता काफी बढ़ी है।

समाज के लिए एक नई राह

जहां जहां देश के महानगरों में महिलाओं के प्रति भेदभाव और महिला हिंसा की खबरें चिंता में डालतीं है। वहीं झारखंड का यह छोटा सा गांव तिरिंग गांव की यह पहल पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

यह दिखाता है कि बदलाव सिर्फ सरकारी नीतियों से ही नहीं, बल्कि उन नीतियों को लोगों की सोच से जोड़ने की है जब समाज बेटियों को दिल से बराबरी का दर्जा देगा, तभी महिला सशक्तिकरण का सपना साकार हो सकेगा।

झारखंड का तिरिंग के बदलाव की पहल यह बताती है कि अपने समाज में छोटी-छोटी सकारात्मक बदलाव करें, तो उसका दूरगामी प्रभाव पूरे देश पर पड़ सकता है।

Share Article:

Sunday को क्यों न बनाएं funday!

रविवार यानी संडे, छुट्टी का दिन, एक ऐसा दिन जब हम अपनी दिनचर्या की भागदौड़ से राहत पाते हैं। लेकिन क्या हम इसे सिर्फ आराम का दिन मानकर गंवा देते हैं, या इसे सच में खुशियों से भर सकते हैं? आइए इस संडे को ‘खुशियों का संडे’ बनाने के कुछ शानदार तरीकों पर गौर करें।

अपने लिए समय निकालें

पूरे हफ्ते की व्यस्तता के बाद, संडे को अपने लिए समय दें। अपनी पसंदीदा किताब पढ़ें, कोई नई चीज़ सीखें, या सिर्फ शांति से बैठकर खुद से संवाद करें। यह आत्म-विश्लेषण और मानसिक शांति का बेहतरीन अवसर हो सकता है।

 परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं

व्यस्त दिनचर्या में अपनों के लिए समय निकालना मुश्किल हो सकता है। संडे को परिवार के साथ बैठकर बातें करें, साथ में खाना खाएं या कोई गेम खेलें। अगर दोस्तों से लंबे समय से मुलाकात नहीं हुई है, तो उनसे मिलने या वीडियो कॉल करने का प्लान बनाएं।

शरीर और मन का रखें ख्याल 

रविवार को शरीर और मन को तरोताजा करने के लिए योग, ध्यान या हल्का व्यायाम करें। एक अच्छी वॉक पर जाएं या किसी पार्क में जाकर ताज़ी हवा लें। इससे न केवल शरीर स्वस्थ रहेगा, बल्कि मन भी प्रसन्न रहेगा।

अपने शौक पूरे करें

संडे को सिर्फ सोने या मोबाइल पर समय बिताने के बजाय अपने शौक पूरे करें। पेंटिंग, म्यूजिक, डांस, गार्डनिंग जैसी चीज़ों में शामिल होकर खुद को खुश करें। इससे रचनात्मकता भी बढ़ती है और मन को सुकून भी मिलता है।

  दूसरों में बांटे खुशी 

खुशियों को फैलाना भी अपने संडे को यादगार बनाने का एक तरीका हो सकता है। किसी जरूरतमंद की मदद करें, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए छोटे-छोटे प्रयास करें। दान करें, किसी बूढ़े व्यक्ति से बातचीत करें या बच्चों के साथ खेलें। यह आपको भी आंतरिक संतुष्टि देगा।

 नई योजना बनाएं

आने वाले हफ्ते के लिए योजनाएं बनाएं। अपने लक्ष्यों पर ध्यान दें और उनकी प्राप्ति के लिए छोटी-छोटी रणनीतियाँ बनाएं। यह आपको आने वाले दिनों में प्रेरित और व्यवस्थित रखेगा।

 मनपसंद खाने का आनंद लें

संडे को अपने पसंदीदा व्यंजन बनाएं या बाहर किसी अच्छे रेस्तरां में जाकर परिवार के साथ भोजन करें। अच्छा खाना मूड को बेहतर करता है और आपको पूरे हफ्ते के लिए तरोताजा महसूस कराता है।

संडे को केवल एक छुट्टी के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपनी खुशियों को बढ़ाने और नई ऊर्जा प्राप्त करने के अवसर के रूप में अपनाएं। छोटी-छोटी चीज़ों से संडे को यादगार और आनंददायक बनाया जा सकता है। तो अगली बार जब संडे आए, इसे केवल ‘संडे’ न रहने दें, बल्कि इसे ‘खुशियों का संडे’ बना दें!

Share Article:

Exam में तनाव को ऐसे कहें bye-bye

परिणाम से ज्यादा महत्वपूर्ण है प्रयास!परीक्षा का नाम सुनते ही दिल की धड़कन तेज हो जाना, हाथ-पैर ठंडे पड़ जाना, और मन में तरह-तरह के सवाल उठना—यह सब बहुत सामान्य है। हर छात्र इसे महसूस करता है। यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं होती, बल्कि कई सपनों, उम्मीदों और संघर्षों की कसौटी होती है। माता-पिता की उम्मीदें, अपने भविष्य की चिंता और समाज का दबाव—सब मिलकर इस तनाव को और बढ़ा देते हैं।

 

 

लेकिन क्या यह सही तरीका है? क्या परीक्षा केवल नंबर का खेल है, या यह हमारी काबिलियत को निखारने का एक अवसर?सोचिए, जब कोई खिलाड़ी मैदान में उतरता है, तो वह सिर्फ जीतने की नहीं, बल्कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की सोचता है। जब कोई कलाकार मंच पर होता है, तो वह सिर्फ तालियों के लिए नहीं, बल्कि अपनी कला को जीने के लिए वहां होता है। तो परीक्षा में हम क्यों डरते हैं? यह भी तो खुद को साबित करने का एक अवसर है!अगर हम सही तरीके से तैयारी करें, आत्मविश्वास बनाए रखें और तनाव से दूर रहें, तो परीक्षा को आसान और सफलता को सुनिश्चित किया जा सकता है।

आइए जानते हैं कुछ बेहतरीन टिप्स, जो आपको परीक्षा में कूल और कॉन्फिडेंट बनाए रखेंगे।

सही योजना और टाइम मैनेजमेंट

पढ़ाई के लिए एक संगठित योजना बनाएं।कठिन विषयों को पहले और आसान विषयों को बाद में पढ़ने की रणनीति अपनाएं।छोटे-छोटे ब्रेक लेकर पढ़ाई करें ताकि ध्यान केंद्रित बना रहे।


सकारात्मक सोच बनाए रखें

खुद को बार-बार याद दिलाएं कि आपने पूरे वर्ष मेहनत की है और आप परीक्षा के लिए तैयार हैं।
नकारात्मक विचारों को हावी न होने दें, बल्कि आत्मविश्वास बनाए रखें।
सफलता के छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उन्हें पूरा करें, इससे आत्मबल बढ़ेगा।


अच्छी नींद और खान-पान का रखें ध्यान

परीक्षा के दिनों में नींद से समझौता न करें। कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें।
जंक फूड की जगह पौष्टिक भोजन करें, जिससे दिमाग और शरीर दोनों ऊर्जावान रहें।
हाइड्रेटेड रहें और पर्याप्त पानी पिएं।


तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन और एक्सरसाइज

रोजाना 10-15 मिनट मेडिटेशन करें, इससे दिमाग शांत और केंद्रित रहेगा।
हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या योग करें ताकि शरीर और मन दोनों ताजगी महसूस करें।

तुलना न करें, खुद पर भरोसा रखें

दूसरों की पढ़ाई से खुद की तुलना न करें, क्योंकि हर किसी की तैयारी का तरीका अलग होता है।
अपने मजबूत पक्षों पर ध्यान दें और परीक्षा को सकारात्मक दृष्टिकोण से लें।

परीक्षा हॉल में अपनाएं ये टिप्स

प्रश्न-पत्र मिलने के बाद घबराएं नहीं, पहले गहरी सांस लें और पेपर को ध्यान से पढ़ें।
जो प्रश्न आसान लगें, उन्हें पहले हल करें ताकि आत्मविश्वास बना रहे।
समय का सही प्रबंधन करें और उत्तर लिखने में स्पष्टता बनाए रखें।

परीक्षा जीवन का केवल एक हिस्सा है, यह पूरी जिंदगी नहीं है। मेहनत, आत्मविश्वास और सही रणनीति से परीक्षा के तनाव को दूर किया जा सकता है। याद रखें, परीक्षा केवल ज्ञान को परखने का जरिया है, आपकी पूरी क्षमता को आंकने का नहीं। इसलिए शांत रहें, सकारात्मक सोचें और अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। सफलता निश्चित ही आपके कदम चूमेगी!

Share Article:

FAST LOVE TREND : बड़े धोखे हैं इस राह में

प्यार… एक भोला सा एहसास, प्यार …एक शर्बतों सी मीठास, प्यार जिसमें हर पहर मन खिल कर गुलाब होता हो। यह वह नर्म सी भावनाओं की छुअन है जो एक दूसरे के दिल में महक उठता है।आज वर्चुअल वर्ल्ड ने प्यार को एक नया विस्तार तो दिया पर इस विस्तार के साथ प्रेम का बाजार भी फलता फूलता गया। प्रेम के बाजार ने इसे फास्ट बना दिया। आज प्यार इंस्टेंट एनर्जी ड्रिंक की तरह हों गया है। वैलेंटाइन डे पर पढ़िए आज के first Love culture और इसके side effect के बारे में…

आज सोशल मीडिया पर दोस्ती होती है। इमोजी के रूप में भावनाओं का आदान प्रदान होता है और फिर आई लव यू के रेडिमेड रेड टैम्पलेट से प्यार का इजहार भी हो जाता है।

आज का प्यार काफी फास्ट हो चुका है। व्हाट्सएप पर जन्म लेता है और इंस्टाग्राम पर जवान होता है । मोबाइल के टच एक से प्यार, तकरार और ब्रेकअप तक की आजादी और आपाधापी है । इन सब में कोई झिझक भी नहीं। यह आज का लव ट्रेंड है।


मोबाइल और इंटरनेट युग ने बदला love Trend

वैलेंटाइन डे कभी प्रेम के पवित्र और गहरे एहसास का प्रतीक हुआ करता था, लेकिन आज यह एक ‘बाज़ार का उत्सव’ बन चुका है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के फ़ास्ट युग में में प्यार भी उतना ही फास्ट हो गया है—फटाफट मुलाकात, झटपट कन्फेशन, और फिर जल्द ही ब्रेकअप।

जहां पहले प्रेम एक एहसासों और भावनाओं की धीमी यात्रा थी, जिसमें परस्पर समझ, धैर्य और समर्पण की जरूरत होती थी,

वहीं अब यह इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन (तत्काल संतुष्टि) का साधन बन गया है। युवाओं के लिए प्यार अब एक गहरी भावना की बजाय एक स्टेटस सिंबल और टाइमपास का जरिया बनता जा रहा है 

प्यार या सोशल मीडिया का स्टेटस?

पहले जहां प्रेम पत्र लिखे जाते थे, घंटों एक-दूसरे से मिलने के मौके तलाशे जाते थे, वहीं अब प्यार इंस्टाग्राम स्टोरीज़, व्हाट्सएप स्टेटस और डीपी चेंज करने तक सीमित हो गया है। अगर कोई पार्टनर सोशल मीडिया पर ‘रिलेशनशिप स्टेटस’ अपडेट नहीं करता या वैलेंटाइन डे पर फैंसी गिफ्ट नहीं देता, तो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता।

अब प्यार का मापदंड यह हो गया है कि आपका पार्टनर आपके पोस्ट पर कितने हार्ट इमोजी भेजता है, या आपके साथ कितनी ‘कपल रील्स’ बनाता है। सोशल मीडिया ने रिश्तों को सिर्फ दिखावे तक सीमित कर दिया है, जहां असली भावनाओं की बजाय ‘वर्चुअल वेलिडेशन’ को महत्व दिया जाता है।

 

डेटिंग ऐप्स और ‘स्वाइप कल्चर’ की दुनिया

आज  प्यार मिलना आसान हो गया है—बस एक क्लिक, एक स्वाइप और नई चैट शुरू! लेकिन यह सुविधा प्यार को गहरा बनाने की बजाय उसे सतही बना रही है। डेटिंग ऐप्स के ज़रिए रिश्ते इतनी जल्दी बनते हैं कि उनके टूटने की परवाह ही नहीं रहती।

टिंडर, बंबल, हिंज जैसे ऐप्स ने प्रेम को ‘ऑप्शंस का खेल’ बना दिया है। एक व्यक्ति से मन भरते ही दूसरा विकल्प हाज़िर रहता है।

यह ‘स्वाइप कल्चर’ युवाओं को लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट से दूर कर रही है, जहां वे किसी रिश्ते को निभाने की बजाय नए ऑप्शन तलाशने में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं।

ब्रेकअप इतना आसान क्यों हो गया?

पहले जब रिश्ते टूटते थे, तो लोग उसे बचाने की कोशिश करते थे, समझौते करते थे और उसे निभाने की पूरी कोशिश करते थे। लेकिन आज ब्रेकअप करना उतना ही आसान हो गया है जितना कि एक एप्लिकेशन डिलीट करना।

छोटी-छोटी बातों पर ब्रेकअप होना आम बात हो गई है। ‘घोस्टिंग’ (बिना बताए रिश्ता खत्म कर देना), ‘स्लो फेडिंग’ (धीरे-धीरे कम होते टेक्स्ट और कॉल्स) और ‘सिचुएशनशिप’ (जहां कोई भी रिश्ता परिभाषित नहीं होता) जैसे ट्रेंड्स रिश्तों में अनिश्चितता और अस्थिरता ला रहे हैं।

रिश्तों में छोटी परेशानियों से बचने के लिए ब्रेकअप का रास्ता चुना जाता है, बजाय इसके कि आपसी समझदारी से रिश्ते को बचाया जाए। प्यार अब धैर्य और समर्पण की बजाय ‘जब तक सब ठीक है, तब तक ठीक है’ वाले फॉर्मूले पर चल रहा है।

क्या प्यार केवल गिफ्ट्स और डेट्स तक सीमित है?
बाजार ने प्रेम को एक महंगी चीज़ बना दिया है।

वैलेंटाइन डे पर महंगे गिफ्ट्स, फैंसी डेट्स और सरप्राइज़ प्लानिंग अनिवार्य मान लिए गए हैं। अगर कोई इन सब चीजों में पीछे है, तो उसे ‘रोमांटिक’ नहीं माना जाता।

पहले जहां प्यार का इज़हार एक सच्चे दिल से होता था, अब यह महंगे गुलाब, चॉकलेट, डिनर डेट्स और ब्रांडेड गिफ्ट्स से तय होने लगा है।यह बाज़ार प्रेम का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन हम इसे समझ नहीं पा रहे।

क्या है फास्ट लव में प्यार का गणित ?

मोबाइल और इंटरनेट ने हमें करीब तो ला दिया है, लेकिन भावनात्मक रूप से शायद दूर कर दिया है। लोग अब टेक्स्टिंग से गहराई तक पहुंचने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या वाकई टेक्स्ट से प्यार महसूस किया जा सकता है?

प्यार एक एहसास है, एक यात्रा है, न कि कोई ऑनलाइन ट्रेंड या टाइमपास। यह केवल आकर्षण या सुविधा नहीं, बल्कि आत्मीयता, समझ और परस्पर सम्मान का नाम है।

प्यार को फिर से समझने की जरूरत 

इस वैलेंटाइन डे पर ज़रूरी है कि हम खुद से पूछें—क्या हमारा प्यार असली है? क्या हम सिर्फ बाजार और ट्रेंड्स के पीछे तो नहीं भाग रहे हैं,

सच्चा प्यार वक्त और समझदारी मांगता है, यह सिर्फ दिखावे और तात्कालिक संतुष्टि से नहीं टिकता। इसलिए जरूरी है कि हम प्यार को दोबारा उसी भावनात्मक गहराई से देखें, जहां रिश्ता सिर्फ स्टेटस अपडेट नहीं, बल्कि दिल से दिल का जुड़ाव हो।

Share Article:

इस वैलेंटाइन, खुद से ,खुद को कहें— ‘I LOVE U’

वैलेंटाइन वीक आ चुका है। प्रेम की मादक मिठास हवा में घुलने लगी है। हर कोई अपने प्रिय से अपने प्यार का इजहार कर रहा है— कोई गुलाब देकर अपने इश्क पर फना हो जाना चाहता है तो कोई , तो कोई अपने प्रेम जज़्बातों को शब्दों में पिरोकर प्यार के इन लम्हे को अमर कर देना चाहता है ।

लेकिन इस प्यार के मौसम में एक रिश्ता अक्सर नज़र अंदाज़ हो जाता है वो है हमारा खुद से खुद का रिश्ता।

क्या हमने कभी खुद से कहा है, “

I LOVE U  ?

क्या हम खुद को वैसे ही अपनाते हैं, जैसे हम दूसरों को अपनाने की चाह रखते हैं ? शायद नहीं। कभी नहीं।

हम अक्सर अपनी कमियों पर ध्यान देते हैं, खुद की आलोचना करते हैं, और खुद को उतना महत्व नहीं देते जितना दूसरों को देते हैं। लेकिन इस वैलेंटाइन क्यों न अपने लिए समय निकालें और खुद से एक वादा करें— यह वादा हो खुद से प्यार करने का, खुद को अपनाने का, खुद की सराहना करने का।

क्यों जरूरी है खुद से प्रेम ?

हम जीवनभर दूसरों की पसंद, उनकी स्वीकृति और उनके प्रेम को पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। लेकिन जब तक हम खुद को नहीं अपनाते, तब तक कोई भी बाहरी प्रेम हमें पूर्ण नहीं कर सकता। खुद से प्रेम आत्म-सम्मान की नींव रखता है। यह हमें आत्मविश्वास देता है, खुशी का एहसास कराता है और कठिन परिस्थितियों में हमें मजबूत बनाए रखता है।

जब हम खुद से प्रेम करते हैं, तो हम खुद को किसी शर्त के बिना स्वीकारते हैं— अपनी अच्छाइयों के साथ, अपनी कमजोरियों के साथ, अपनी असफलताओं और सफलताओं के साथ। यह स्वीकृति हमें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है।

खुद से प्रेम करने के तरीके

आईने के सामने खड़े होकर खुद से कहें— “आई लव यू”
पहली बार यह अजीब लग सकता है, लेकिन जब आप इसे रोज़ कहेंगे, तो आपको खुद से एक गहरा जुड़ाव महसूस होगा।

अपनी गलतियों को करें माफ

हम सब गलतियां करते हैं, लेकिन खुद को दोषी ठहराने के बजाय, खुद को माफ करें और आगे बढ़ें।

खुद को सराहें

आपको किसी और जैसा बनने की जरूरत नहीं है। आप जैसे हैं, वैसे ही अनमोल हैं। अपनी खूबियों को पहचानें और उनका जश्न मनाएं।

अपने लिए निकालें समय

दूसरों की देखभाल करने के साथ-साथ खुद का भी ख्याल रखें। खुद को वो खुशियां दें, जिनकी आप हकदार हैं— चाहे वो एक किताब पढ़ना हो, संगीत सुनना हो, या अकेले कहीं घूमने जाना हो।

अपनी उपलब्धियों पर हो गर्व

बड़ी हो या छोटी, हर उपलब्धि मायने रखती है। खुद की मेहनत को पहचानें और खुद को शाबाशी दें।

जब आप खुद से प्रेम करेंगे, तब दुनिया भी आपसे प्रेम करेगी । जिस तरह किसी पौधे की जड़ें मजबूत होने पर ही वह बड़ा और हरा-भरा हो सकता है, उसी तरह जीवन में दूसरों से प्रेम पाने के लिए सबसे पहले खुद से प्रेम करना जरूरी है। जब हम खुद को स्वीकारते हैं, तो हम दूसरों से भी बिना शर्त प्रेम कर सकते हैं।

इस वैलेंटाइन, गुलाबों और गिफ्ट्स से ज्यादा जरूरी है खुद को अपनाना, खुद को प्यार करना

खुद से यह कहिए—”मैं खुद को पूरी तरह स्वीकार करता/करती हूं। मैं अपनी गलतियों से सीखता/सीखती हूं। मैं खुद से प्रेम करता/करती हूं, क्योंकि मैं इस प्रेम का हकदार हूं।”

याद रखिए, सबसे खूबसूरत प्रेम वही है, जो खुद से शुरू होता है!

Share Article:

‘गोली श्यामला गारू’,की यह कहानी आपको पढनी चाहिए

कई बार हम उम्र को खुद के विकास में अवरोध मानने लगते हैं, पर यह सच नहीं होता। आज हम आपको ऐसी ही एक महिला की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने बढ़ती उम्र  की परवाह छोड़  एक नया  कीर्तिमान रचा।  यह  नाम है गोली श्यामला गारू, जिन्होंने 52 साल की उम्र में समुद्र की कठिन परिस्थितियों को चुनौती देते हुए 150 किलोमीटर की दूरी तैरकर पूरी की। यह असाधारण उपलब्धि उन्होंने विशाखापत्तनम से काकीनाडा तक के सफर में हासिल की, जिसे पूरा करने में उन्हें छह दिन लगे।

ऐसी रही असंभव को संभव बनाने की यात्रा

गोली श्यामला ने 28 दिसंबर 2024 को विशाखापत्तनम से अपनी यात्रा शुरू की और 3 जनवरी 2025 को काकीनाडा के सूर्यरावपेट एनटीआर बीच पर पहुंचकर इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। हर दिन औसतन 30 किलोमीटर तैरते हुए, उन्होंने समुद्र की तेज लहरों, मौसम की चुनौतियों और थकान को परास्त किया। यह उपलब्धि न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणादायक है।

पहले भी रचा है इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब गोली श्यामला ने अपनी साहसिक तैराकी से लोगों को चौंकाया हो। इससे पहले भी उन्होंने राम सेतु, श्रीलंका और लक्षद्वीप के समुद्र में तैराकी करके अपनी असाधारण क्षमता का परिचय दिया था। उनकी यह उपलब्धि उम्र और शारीरिक सीमाओं को तोड़ते हुए, दृढ़ संकल्प की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है।

समुद्र की लहरों से संघर्ष और जीत

150 किलोमीटर की समुद्री यात्रा केवल शारीरिक शक्ति की परीक्षा नहीं थी, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता का भी प्रमाण थी। खुले समुद्र में, जहां तेज लहरें, जलचक्र, और समुद्री जीवों का खतरा बना रहता है, वहां तैराकी करना किसी साधारण व्यक्ति के लिए नामुमकिन सा लगता है। लेकिन गोली श्यामला ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे जीतकर दिखाया।

मुख्यमंत्री और देशवासियों की सराहना

गोली श्यामला की इस उपलब्धि पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने इसे “असाधारण साहस की कहानी” बताया और कहा कि “गोली श्यामला की यह उपलब्धि महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो यह सिद्ध करती है कि सच्चे संकल्प के आगे कुछ भी असंभव नहीं है।”

इच्छाशक्ति से मिलती है सबलता 

गोली श्यामला की कहानी हमें यह सिखाती है कि  उम्र मुकाम गढ़ने में मायने नहीं रखती । अगर हमारे भीतर कुछ कर गुजरने की चाहत हो, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्ची इच्छाशक्ति और समर्पण से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

उनकी यह अद्भुत उपलब्धि हमें यह प्रेरणा देती है कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए कभी भी देर नहीं होती। यदि हमारे पास धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास है, तो हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।

सलाम इस साहसी महिला को!

गोली श्यामला की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल तो है ही यह बताती है  कि किसी  भी उम्र में मेहनत, साहस और समर्पण से लक्ष्य पर विजय पाया  जा सकता है। यह कहानी यह भी बताती है कि

 जीत उन्हीं की होती है जो अपने डर से आगे बढ़ने का हौसला रखते हैं।”

फोटो: साभार सोशल मीडिया

 

Share Article:

रोते-रोते हंसना सीखो…

कभी-कभी जीवन में ऐसे पल आते हैं जब मन बेवजह उदास हो जाता है। आंखें अनायास बरस पड़ती हैं। ऐसा लगता है कि कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा, सब कुछ ठहर सा गया है। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि उदासी भी जीवन का हिस्सा है, और इसे दूर करने के तरीके हमारे ही हाथ में होते हैं। जब भी मन भारी लगे, इन आसान लेकिन प्रभावशाली तरीकों को अपनाएं –

खुद से बातें करें, अपनी भावनाओं को समझें

मन उदास होने का एक बड़ा कारण यह है कि हम अपनी भावनाओं को अनदेखा करते हैं। जब भी ऐसा महसूस हो, एक शांत जगह पर बैठें और खुद से पूछें – “मुझे क्या परेशान कर रहा है?” अपनी भावनाओं को स्वीकार करें और उन्हें समझने का प्रयास करे।

अपनी पसंदीदा चीजें करें

जो काम आपको खुशी देता है, उसे करें। चाहे वह किताब पढ़ना हो, संगीत सुनना हो, पेंटिंग करना हो या कोई पुराना शौक फिर से अपनाना हो। यह आपको तुरंत राहत देगा और मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देगा।

खुद को प्रकृति के करीब लाएं

खुली हवा में टहलना, सूरज की हल्की किरणों को महसूस करना या किसी बगीचे में बैठकर हरियाली को निहारना – यह सब मन को सुकून देता है। प्रकृति में अपार शांति और ऊर्जा होती है, जो हमारी नकारात्मक भावनाओं को दूर कर सकती है।

किसी अपने से  करें बात 

जब भी मन उदास हो, अपने किसी करीबी दोस्त, परिवार के सदस्य या उस व्यक्ति से बात करें, जो आपको समझता हो। दिल की बातें साझा करने से मन हल्का होता है और नई ऊर्जा मिलती है।

ध्यान और प्राणायाम करें

मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की तकनीकें न केवल तनाव को कम करती हैं, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती हैं। सिर्फ 5-10 मिनट ध्यान करने से आपका मूड काफी बेहतर हो सकता है।

अपने आभार को महसूस करें

जो कुछ भी आपके पास है, उसके लिए आभार प्रकट करें। हर दिन सुबह या रात को 5 चीजें लिखें, जिनके लिए आप आभारी हैं। यह आदत आपके मन को सकारात्मक दृष्टिकोण देने में मदद करेगी।

अपनी उपलब्धियों को याद करें 

अपनी उपलब्धियों को याद करें, अपनी ताकत को पहचानें और खुद को स्वीकार करें। याद रखें, आप अनमोल हैं, और यह उदासी केवल अस्थायी है। खुद को समय दें और धैर्य रखें।

प्रेरणादायक बातें पढ़ें और सुनें

महान व्यक्तियों की कहानियाँ, मोटिवेशनल स्पीच या कोई सकारात्मक किताब – यह सब आपके विचारों को ऊर्जावान बना सकता है। जीवन में हर मुश्किल का हल होता है, बस नजरिया बदलने की जरूरत होती है।

दूसरों की मदद करें

किसी जरूरतमंद की सहायता करना, गरीब बच्चों को पढ़ाना, किसी की छोटी-सी मदद करना – यह सब आपको अंदर से संतोष देगा और जीवन को एक नई दिशा देगा। जब आप किसी और के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, तो आपकी उदासी खुद-ब-खुद दूर हो जाती है।

खुद को नई उम्मीदों से भरें

यह याद रखें कि यह कठिन समय स्थायी नहीं है। हर रात के बाद सवेरा आता है, और आपकी जिंदगी में भी उजाले की किरणें लौटेंगी। खुद को याद दिलाएं –
“यह वक्त भी गुजर जाएगा, और मैं इससे और भी मजबूत बनकर निकलूंगा!”

अंत में:
उदासी को खुद पर हावी न होने दें। यह भी जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन यह आपको रोक नहीं सकती। आप खुद अपने जीवन के रचनाकार हैं, अपनी खुशियों को खुद चुनें और जीवन की खूबसूरती को फिर से महसूस करें!

खुद पर विश्वास रखें, मुस्कुराते रहें, और आगे बढ़ते रहें!”

Share Article:

ऐसे खिलखिला उठेगा मन में बसंत

वसंत ऋतु की  दस्तक हो चुकी है। फिजा में बसंती मिठास तैर  रही है, पेड़-पौधों पर नई कोंपलें खिलखिलाते  रही है। फूलों की भीनी महक वातावरण को सुगंधित कर रही है। पर क्या हमारा मन भी वासंती उत्साह और उमंग से भर गया है? या फिर जीवन की आपाधापी, चिंताओं और उदासियों ने उसे बेरंग, पतझड़ सा बना रखा है?

सच तो यह है कि वसंत केवल बाहर नहीं आता, उसे मन के भीतर भी लाना पड़ता है। अगर दिल भारी हो, आँखों में नमी हो और चेहरे पर मुस्कान न हो, तो बाहर का यह खिलता मौसम भी मन के वीराने को नहीं भर सकता। असली वसंत वह है, जो हमारे भीतर खिलता है, हमारे विचारों में बसता है, और हमारी आत्मा को रंगों से भर देता है।

कैसे लाएं मन में वसंत?

पुराने दुखों की पतझड़ को विदा करें

जैसे पेड़ अपने सूखे पत्तों को गिराकर नए पत्तों के लिए जगह बनाते हैं, वैसे ही हमें भी अपने जीवन से पुराने दुख, गिले-शिकवे और निराशाओं को छोड़ना होगा। बीती बातों को पकड़े रहने से हम भविष्य के वसंत का स्वागत नहीं कर सकते।

छोटी खुशियों के फूल खिलाएं

खुश रहने के लिए किसी बड़े मौके की जरूरत नहीं होती। सूरज की पहली किरण को महसूस करना, बच्चों की हंसी सुनना, किसी जरूरतमंद की मदद करना—इन छोटी-छोटी चीजों में ही असली आनंद छिपा होता है। इन पलों को संजोने से जीवन में वसंत अपने आप उतर आता है।

 संगीत से सजाएं अपनी आत्मा को 

प्रकृति में हर चीज़ की अपनी लय है—पंछियों की चहचहाहट, हवा की सरसराहट, झरने की कलकल। इन ध्वनियों को महसूस करें और अपने मन को भी किसी मधुर गीत की तरह बहने दें। संगीत वह जादू है, जो मन की उदासी को पिघलाकर उसे उमंग से भर देता है।

खुद से करें प्यार 

अक्सर हम दूसरों के लिए जीते हैं, उनकी उम्मीदों को पूरा करने में अपने भीतर की खुशियों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन खुद से प्यार किए बिना कोई भी सच में खुश नहीं रह सकता। अपने लिए समय निकालें, अपनी रुचियों को दोबारा जिएं, और खुद को भी वही स्नेह दें, जो दूसरों को देते हैं।

वसंत केवल महसूस करने के लिए नहीं, जीने के लिए होता है। घर से बाहर निकलें, हरे-भरे पेड़ों को देखें, फूलों की खुशबू लें, और जीवन की गति को थोड़ा धीमा करें। प्रकृति के पास एक अनकहा जादू है, जो हमारे भीतर के सन्नाटे को मधुर संगीत में बदल सकता है।

असली वसंत भीतर खिलता है

अगर आपका मन प्रसन्न है, तो हर मौसम वसंत जैसा लगेगा। लेकिन अगर भीतर निराशा है, तो बसंत का यह सुहावना मौसम भी फीका लगेगा। इसलिए, इस बार केवल बाहरी वसंत का स्वागत न करें, बल्कि अपने मन में भी खुशियों के फूल खिलाएं।

आइए, इस वसंत ऋतु में हम खुद से यह  वादा करें कि हम जीवन को हल्केपन से जिएंगे, छोटी-छोटी खुशियों को समेटेंगे, और अपने मन के भीतर भी एक सुंदर वसंत बसाएंगे—एक ऐसा वसंत, जो कभी न बीते।

Share Article:

हौले-हौले झरोखे, चलो खोलें खुशी के

हम अक्सर जीवन में बड़ी सफलताओं, ऊँचे पदों और भव्य उपलब्धियों की तलाश में रहते हैं, लेकिन सच्ची खुशी उन्हीं में सीमित नहीं होती। असल में, जीवन की सबसे मधुर मुस्कानें उन छोटी-छोटी खुशियों में छुपी होती हैं, जिन्हें हम अनदेखा कर देते हैं।

एक बच्चे की निश्छल हँसी, बारिश की पहली फुहार, माँ के हाथों का बना खाना, पुराने दोस्त का अचानक मिल जाना, या किसी जरूरतमंद की मदद करने से मिलने वाली आत्मिक संतुष्टि—ये सब हमारे जीवन को संवारते हैं और उसे अर्थपूर्ण बनाते हैं।

छोटी खुशियों का महत्व को हम ऐसे समझ सकते हैं


मानसिक शांति और संतोष

रोजमर्रा की भागदौड़ में जब हम छोटी-छोटी खुशियों को पहचानना सीखते हैं, तो जीवन में संतोष बढ़ता है। हमें एहसास होता है कि खुशी सिर्फ बड़ी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि साधारण पलों में भी बसती है।

सकारात्मक दृष्टिकोण

जो लोग छोटी-छोटी खुशियों को महत्व देते हैं, वे अधिक सकारात्मक और खुशमिजाज होते हैं। यह आदत कठिन समय में भी हमें आशावादी बनाए रखती है और हमें मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।

रिश्तों में मिठास

किसी अपने के साथ बैठकर हँसी-मजाक करना, परिवार के साथ भोजन करना, या दोस्तों के साथ पुरानी यादें ताजा करना—ये छोटे-छोटे पल रिश्तों को गहराई देते हैं और जीवन को रंगीन बनाते हैं।

तनाव में कमी

जब हम छोटे-छोटे सुखों को महसूस करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क सकारात्मक हार्मोन (जैसे डोपामिन और सेरोटोनिन) का स्राव करता है, जिससे तनाव कम होता है और हम अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं।

ऐसे पहचाने छोटी-छोटी खुशियाँ

वर्तमान में जिएँ: भविष्य की चिंताओं और अतीत के पछतावे में फँसे रहने के बजाय, वर्तमान के छोटे सुखों को महसूस करें।
आभार प्रकट करें: जो कुछ भी हमारे पास है, उसके लिए कृतज्ञ रहें। इससे मन में संतोष बढ़ता है।
छोटी चीज़ों में आनंद ढूँढें: सुबह की ताज़ी हवा, चिड़ियों की चहचहाहट, या किसी प्रियजन का स्नेह—इन पलों को संजोएँ।
दूसरों को खुश करें: किसी को मदद करना या किसी का दिन बेहतर बनाना, खुद के लिए भी खुशी लाता है।

बड़े सपने देखना और सफलता पाना ज़रूरी है, लेकिन असली खुशी छोटे-छोटे पलों में छुपी होती है। अगर हम इन पलों को महसूस करना सीख लें, तो जीवन अपने आप ही खुशनुमा और संतोषजनक हो जाएगा।

इसलिए, खुशियों को तलाशने के बजाय, उन्हें महसूस करना शुरू करें—क्योंकि छोटी खुशियाँ ही मिलकर बड़े सुख की राह बनाती हैं।

Share Article:

कहानी जन-मन में कानूनी जागरूकता भरने वाले पूर्व न्यायाधीश बटेश्वर नाथ पाण्डेय की

यह कहानी एक ऐसे शख्स की है जिनका बचपन मुफलिसी में बीता । किसान पिता के कथन और संघर्ष को मंत्र बना उन्होंने न सिर्फ खुद को स्थापित किया बल्कि न्याय का सूर्य बन अंधेरे समय और समाज में सत्यमेव जयते का रंग और राग भरा। सबसे कम समय में न्याय दिलवाने की बात हो या फिर सबसे तेजी से मुकदमे का निपटारा करने की। गांव- जवार जाकर आम लोगों को कानूनी बारिकियों से अवगत कराने से लेकर स्कूली बच्चों को आसान भाषा में कानूनी अधिकारों का फलसफा बताने तक , बिना रुके बिना थके जोश- जुनून और नई उम्मीद से लैस। मकसद यह की सच की कसौटी बुलंद होती रहे कानून की इबारत , बुलंद होता रहे हमारा लोकतंत्र और महफूज हो निर्भयता के साथ मस्तक ऊंचा कर मुस्कुराती रहें वसुंधरा। आज कहानी मुश्किल हालातों से दो दो हाथ कर कानून की अनवरत रक्षा का प्रण लेने वाले पूर्व न्यायाधीश बटेश्वर नाथ पाण्डेय की…

संघर्ष को बनाया सफलता का साथी

पूर्व न्यायाधीश बटेश्वर  नाथ पाण्डेय का शुरुआती जीवन संघर्षों के कांटेदार रास्ते से गुजरते हुए बीता। जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िला के छोटे से गांव गंगा पाण्डेय का टोला में 1 अप्रैल 1963 को हुआ।
पिता स्वर्गीय बलिराम पाण्डेय सामान्य खेती- किसानी से जुड़े थे। मां स्वर्गीय सहोदरी देवी एक गृहिणी थीं। मां की रुचि धर्म-कर्म में भी काफी ज्यादा थी। बचपन से ही मां ने इन्हें नैतिकता के रास्ते पर चलने की राह दिखाई। पिता की आमदनी अत्यंत सीमित थी पर मन का हौसला असीमित था। वह अपने बच्चों की हौसला-अफजाई करते और बड़े सपने देखने और उसे साकार करने की बात कहते।


गांव के स्कूल से पढ़ाई

पूर्व न्यायाधीश बटेश्वर नाथ पाण्डेय बताते हैं की परिवार में हम दो भाई और तीन बहन थें। मैं भाई में सबसे बड़ा हूं। तब हमारे परिवार की आय बहुत ही कम थी। पिताजी किसी तरह से माह का खर्च चला पाते। आर्थिक आमदनी का जरिया बस खेती ही थी ।

वहां भी मेहनत के बाद उपज की कोई गारंटी नहीं। कभी मौसम की मार से सारी उपज खत्म हो जाती तो कभी जानवर और टिड्डों की भेंट चढ़ जाती।

Share Article: