…इत्ता सा टुकड़ा चांद का

कभी रात के आसमान में नज़र डालिए — चांद हर रात पूरा नहीं होता। कभी आधा, कभी चौथाई, कभी बस इत्ता सा टुकड़ा। फिर भी उसकी चमक कम नहीं होती। वो हर रूप में सुंदर लगता है, क्योंकि वो जानता है कि “अधूरापन भी अपनी जगह खूबसूरत होता है।

 

ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है। हमें हमेशा लगता है कि कुछ और चाहिए — थोड़ा और पैसा, थोड़ा और नाम, थोड़ा और प्यार, थोड़ा और वक्त। लेकिन इस “थोड़ा और” की दौड़ में हम “जो है” उसे जीना भूल जाते हैं।

जो है, वही सबसे सुंदर है

हम अक्सर सोचते हैं कि हमारी ज़िंदगी अधूरी है, लेकिन शायद यही अधूरापन हमें इंसान बनाता है। सोचिए — जिस फूल में कांटे न हों, वो कितनी जल्दी मुरझा जाएगा। हमारी परेशानियाँ, हमारी छोटी खुशियाँ, हमारी सीमाएँ — यही हमारी पहचान हैं।

कई बार हमारे पास जो कुछ है, वही किसी और का सपना होता है। आपका घर, आपकी नौकरी, आपकी मुस्कान — किसी और के लिए खुदा की सबसे बड़ी दुआ हो सकती है। फिर क्यों हम शिकायतों में वक्त गँवाएँ, जब हमारे पास आभारी होने की इतनी वजहें हैं?

संतोष हार नहीं, समझ है

संतोष का मतलब ये नहीं कि आप आगे बढ़ना छोड़ दें। इसका अर्थ है — कदम बढ़ाते हुए भी मन को शांति में रखना। क्योंकि जो व्यक्ति हर हाल में मुस्कराना जानता है, उसे कोई भी हालात छोटा नहीं कर सकते।

ज़रा सोचिए — जब चांद अधूरा होता है, तब भी आसमान उसी का होता है। जब आप थोड़े परेशान होते हैं, तब भी ज़िंदगी आपकी होती है। बस फर्क इतना है कि चांद अपनी चमक नहीं छोड़ता… तो फिर हम क्यों छोड़ें?

खुशी तलाशनी नहीं, महसूस करनी  है

खुशी किसी मंज़िल का नाम नहीं, वो तो हर रोज़ के छोटे-छोटे पलों में छिपी होती है। सुबह की एक गर्म चाय, किसी बच्चे की हँसी, किसी पुराने दोस्त का संदेश, या अपने माता-पिता की आंखों की चमक — यही तो वो छोटे टुकड़े हैं, जिनसे मिलकर *पूरा चांद* बनता है।

अगर हम हर दिन इन छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करने लगें, तो ज़िंदगी हमें किसी बड़ी सफलता से भी ज़्यादा संतोष दे जाएगी।

और अंत में…

अगली बार जब आसमान में चांद अधूरा दिखे, तो शिकायत मत कीजिए। बस मुस्कराइए और सोचिए — “इत्ता सा टुकड़ा चांद का भी कितना खूबसूरत है। क्योंकि शायद उसी टुकड़े में आपकी ज़िंदगी की पूरी रोशनी छिपी हो।

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