ब्रिटिश पार्लियामेंट में सम्मान पाने वाली ‘बिहारी’ मधु चौरसिया की कहानी

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मधु चौरसिया बिहार के छोटे से शहर में पली बढ़ी। मुजफ्फरपुर से उनकी पढ़ाई – लिखाई हुई। हाल में ही ब्रिटिश पार्लियामेंट में इंस्पायरिंग इंडियन वूमेन (IIW) द्वारा She Inspire Award 2025 (शी इंस्पायर अवार्ड ) अवार्ड से उन्हें नवाज़ा गया है। लंदन में रहकर महिला सशक्तिकरण पर कार्य करने वाली कई प्रमुख भारतीय और ब्रिटिश मीडिया संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग कर चुकी है। फिलवक्त वे ब्रिटेन में शिक्षिका है। बच्चों में शिक्षा का उजियारा भरने के साथ ही वें समाज के अंधेरे को दूर करने और आधी आबादी की बेहतरीन के लिए काफी जोर शोर से काम कर रही हैं। आज पढ़ें मधु की कहानी

मुझे ब्रिटिश पार्लियामेंट में इंस्पायरिंग इंडियन वूमेन (IIW) द्वारा She Inspire Award 2025 (शी इंस्पायर अवार्ड ) से नवाजा गया है। यह मेरे लिए काफी गौरव का क्षण है साथ ही मेरी समाज के प्रति जिम्मेदार भी बढ़ गई है। मेरी कोशिश है कि मैं एक बेहतर इंसान बनकर समाज की बेहतरी और महिलाओं के शक्ति करण के कार्य को और बेहतर तरीके से निभा सकूं, कहती हैं मधु चौरसिया। मधु लंदन में रहकर भारतीय संस्कृति के वैश्विक फैलाव और महिला सशक्तिकरण में जुटी हैं।

ऐसा रहा शुरूआती सफर 

मधु कहतीं हैं कि मैं 2015 में अपने परिवार के साथ भारत से इंग्लैंड आई , यहां की संस्कृति मेरे लिए नई थी पर दिल तो भारतीय संस्कृति की सुगंध से भरा था। मैं यहां रही रही भारतीय मूल की महिलाओं के ग्रुप से जुड़ी।
हमने भारत की महक को लंदन में भरने की कोशिश की । शुरुआत भारतीय त्योहारों से हुई। यहां हम सभी भारतीय त्योहार को खुब उत्साह से मनाते हैं । छठ हो या फिर दुर्गापूजा, या फिर दिवाली हम त्योहार में यहां भारत सा ही उत्साह और उमंग रहता है। अब त्योहार के बहाने हम दर्जनों परिवार से जुड़ चुके थे फिर मैंने इससे जुड़कर महिलाओं को प्रेरित करने की सोच को जमीन पर उतारने की कोशिश शुरू की। मैंने प्रेरक महिलाओं की कहानियों को साझा करना शुरू किया। इसका काफी बेहतर असर हुआ। महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पहले से मजबूत हुआ।

वे आगे कहती हैं कि हम यहां की महिलाओं के हर सुख-दुख को साझा करने और ग़म को बांटने की कोशिश करते हैं। सच कहूं तो यह सब भारत के छोटे से शहर मुजफ्फरपुर ने मुझे सिखाया था। वहां हम हर सुख दुख को साझा करते थे। भारत और ब्रिटेन का रहन-सहन काफी अलग है। संस्कृति भी और परिवेश भी , पर एक चीज है जो समान है और वह है इंसानियत की भावना और संवेदनशीलता। लंदन में मैं इंस्पायरिंग इंडियन वुमन टीम की एग्जीक्यूटिव मेंबर हूं जो विश्व भर की महिलाओं को एकजुट कर उन्हें हर क्षेत्र में प्रोत्साहित करती है

पत्रकारिता से खासा लगाव 

मधु बताती हैं ,जब मैं भारत से इंग्लैंड आई। तो मैं मीडिया में कार्यरत थी लेकिन पारिवारिक कारणों की वजह से मैंने मीडिया से कुछ सालों के लिए विराम लिया। थोडे साल बाद मैंने फ्रीलांसर का काम शुरू किया मैंने कई भारतीय मीडिया हाउस के लिए इंग्लैंड से रिपोर्टिंग की जैसे न्यूज नेशन,IBC 24, राजस्थान पत्रिका के लिए मैंने एक साल लगातार एक कॉलम लिखा, कोविड के दौरान इंग्लैंड के एक एफ एम चैनल के लिए मैंने रेडियो जॉकी के तौर पर काम किया जिसके बाद मुझे Sky चैनल के MATV पर शो होस्ट करने का मौका मिला जो इंग्लैंड में भारतीय समाज के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। मैं लगातार ४ साल से यह शो होस्ट कर रही हूं।

शिक्षिका का पेशा और पत्रकारिता का जुनून

हालांकि इन दिनों मैं पेशे से मैं यहां के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हूं और पार्ट टाइम मैं एंकरिंग करती हूं। पत्रकारिता मेरे लिए एक जुनून है और इसका उपयोग मै समाज की बेहतरी के लिए करना चाहती हूं।

वे आगे कहती हैं कि मुझे इंग्लैंड की नागरिकता मिल गई है लेकिन मेरी कोशिश रहती हैं कि मैं अपने बच्चों की भारतीय कल्चर से जोड़ कर रखूं। हम भारतीय त्योहार बड़े धूमधाम से मनाते हैं। हम भारतीय एक जगह एकत्रित होकर हर त्यौहार में मिनी इंडिया क्रिएट करने की कोशिश करते हैं।

भारतीय मीडिया हाउस से अब भी जुड़ी  हूं । सरकारी नौकरी की वजह से अब हफ्ते के ५ दिन तो व्यस्त रहती हूं लेकिन जब भी मौका मिलता है मैं पत्रकारिता के लिए वक्त निकाल लेती हूं। पत्रकारिता मेरा पैशन है जिसके लिए मैं हमेशा दिल और दिमाग से तैयार रहती हूं । पत्रकारिता मुझे बेहद सुकून देता है मुझे इससे आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

यह है भविष्य की योजना

मधु चौरसिया का कहना है कि आने वाले समय में मैं समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए अपना पॉडकास्ट चैनल शुरू करने की योजना बना रही हूं। खास Youtube चैनल की भी शुरुआत जल्द करने की योजना है इसके साथ ही एक डॉक्यूमेंट्री पर भी काम कर रही हूं।

पत्रकारिता विभाग के छात्रों को पढ़ाऊं

इधर बिहार आए काफी दिन हो गए हैं। मुझे बिहार के मुजफ्फरपुर में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय स्थित पत्रकारिता विश्वविद्यालय की याद हमेशा आती है। वहां का प्रकृतिक परिवेश, बगीचे के बीच बना हमारा क्लास रूम जिसमें चिड़ियों की आवाज गुंजती थी।


हमारे शिक्षक और सहपाठी सबों की याद आती है। उन दिनों भारतीय पत्रकारिता का दौर सुनहरा था , इन दिनों की तरह विश्वसनीयता पर सवाल तब नहीं उठते थे।
बिहार जब भी जाने का मौका मिला तो मैं बी आर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग जाना चाहूंगी जहां से मैंने अपने पत्रकारिता की शुरुआत की वहां विद्यार्थियों में मिलना और उन्हें यह संदेश देना चाहूंगी कि मैंने भी यहीं से शिक्षा ग्रहण की । यदि मैं बात करूं दूसरे पत्रकारिता संस्थानों की जैसे माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय या IIMC की
तुलना में हमारे यहां संसाधन पर्याप्त नहीं थे। लेकिन इस विश्वविद्यालय ने कई छात्रों की किस्मत बदलें है। मुझे मौका मिला तो मैं अपने विश्वविद्यालय के लिए कुछ करना चाहूंगी ताकि आने वाले भविष्य में विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे एक साहसी पत्रकार बन सकें।

भारतीय संस्कृति की खुशबू

ये हैं प्रेरणास्रोत

मधु बताती हैं कि जब मैं भारत में थी तब मेरी प्रेरणा स्रोत श्रीमती इंदिरा गांधी थीं। इंग्लैंड आने के बाद मैंने क्वीन एलिजाबेथ -२ का रुतबा देखा। यहां उनकी छवि लोगों के दिलों में आज भी बरकरार है। मुझे लगता है उनके जैसी महारानी न आज तक हुई है और न अब कोई होंगी। मुझे उनकी वो बोल्ड छवि काफी प्रेरित करती थीं।

इन दोनों महिलाओं की बोल्डनेस की मैं कायल हूं। जहां इंदिरा को पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला वहीं क्लीन एलिजाबेथ ने लंबे समय तक निर्विवाद न केवल इंग्लैंड बल्कि कॉमन वेल्स देश की कमान संभाली। मैं अपनी जिंदगी में भी कुछ ऐसा कर गुजरना चाहती हूं।

मैं अपने टीवी शो में भी महिलाओं की इंस्पायरिंग स्टोरी टेलीकास्ट करती हूं। इसके अलावा बिहार की महिलाओं के ग्रुप के साथ भी जुड़ी हूं, जो इंग्लैंड में रह रही महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है।

प्रवासी बिहारी महिलाओं के ग्रुप से जुड़ाव

मधु यह भी  बताती हैं कि मैं अपने टीवी शो में भी महिलाओं की इंस्पायरिंग स्टोरी टेलीकास्ट करती हूं। इसके अलावा बिहार की महिलाओं के ग्रुप के साथ भी जुड़ी हूं, जो इंग्लैंड में रह रही महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है।

मधु चौरसिया फिलहाल लंदन में रहकर दुनिया भर की महिलाओं में आत्मविश्वास का उजियारा भरने में जुटी है। इसके लिए वें भारतीय संस्कृति और दर्शन का सहारा लेती है। मधु चौरसिया से वैसे लोगों को सीख लेने की जरूरत है जो मायूसी को अपना साथी मान निराशा के समंदर में डूबे हुए हैं। 

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