यह कहानी उस महिला की है, जिन्होंने शिक्षा के दम पर न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि गांव-गांव जाकर शिक्षा का उजियारा फैलाने में भी जुटी रहीं। अपने दम पर बिहार के छोटे से शहर दरभंगा से राज्यसभा सांसद बनने तक का सफर तय किया।
हौसलों के साथ विकास की यात्रा गतिमान है, और इन सबके बाद भी उनकी सादगी और सरलता ऐसी है कि उनसे बात करते समय यह एहसास ही नहीं होता कि आप किसी शीर्ष राजनेता से संवाद कर रहे हैं।
गांव की पगडंडी से संसद तक की यह यात्रा मिथिला की बेटी डॉ. धर्मशीला गुप्ता की प्रेरक कहानी पढ़िए…
“मैं किसान परिवार से आती हूं। मेरा बचपन लहलहाते खेतों के बीच गुजरा है। पिताजी किसानी से जुड़े रहे। मुझे याद है कि बचपन में हम पुआल बिछाकर धूप का आनंद लेते थे। तब हर घर में कोठी, जांता और ओखल हुआ करता था। मैंने किसानों की समस्याएं भी देखी हैं और ग्रामीण महिलाओं की कठिनाइयों को भी करीब से समझा है।
मेरी राजनीति का मकसद हर वर्ग, जाति और संप्रदाय के लोगों को सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करना है। समाज के हाशिए पर रह रहे लोगों को मुख्यधारा में लाना है और नारी शक्ति को सशक्त होने का एहसास कराना है।”यह कहना है राज्यसभा सांसद डॉ. धर्मशीला गुप्ता का।

बिहार की राजनीति में शिक्षा, सामाजिक सेवा और जनसमर्पण के बल पर राष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाने वाली महिलाओं में डॉ. धर्मशीला गुप्ता, माननीय राज्यसभा सांसद तथा भाजपा महिला मोर्चा, बिहार प्रदेश की अध्यक्ष, का नाम आज विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है।
मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक धरती से निकलकर उन्होंने शिक्षा, समाजसेवा और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
साल 2024 में उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया। वे वरिष्ठ नेता स्व. सुशील कुमार मोदी के स्थान पर संसद के उच्च सदन में पहुंचीं और आज राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की आवाज बुलंद कर रही हैं।
मिथिला की धरती से शुरू हुई प्रेरक यात्रा
डॉ. धर्मशीला गुप्ता का जन्म 27 नवम्बर 1969 को बिहार के मधुबनी जिले में हुआ।
उनके पिता स्व. अशर्फी लाल साह और माता स्व. बिमला देवी ने उन्हें शिक्षा, संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का महत्व सिखाया।
बचपन से ही वे पढ़ाई में मेधावी और सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील थीं। परिवार और समाज के बीच रहते हुए उन्होंने यह समझा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे समाज में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है।
शिक्षा की रौशनी और शिक्षाविद के रूप में पहचान
डॉ. गुप्ता ने अपनी उच्च शिक्षा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने एम.एससी. (वनस्पति विज्ञान) के साथ-साथ बी.एड. और पीएच.डी. जैसी उच्च डिग्रियां हासिल कीं।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षण और अकादमिक क्षेत्र में कार्य करते हुए एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद के रूप में समाज में सम्मान अर्जित किया।
वे कहती हैं—
“शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी साधन है।”
ऐसा है निजी जीवन का सफर
डॉ. धर्मशीला गुप्ता का विवाह परशुराम गुप्ता से हुआ। परिवार में उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
उनका स्थायी निवास बेंता, दरभंगा में है।
वर्तमान में संसदीय कार्यों के कारण वे नई दिल्ली स्थित स्वर्ण जयंती सदन डीलक्स में निवास करती हैं।
समाज सेवा से शुरू की बदलाव की डगर
राजनीति में सक्रिय होने से पहले ही डॉ. धर्मशीला गुप्ता का समाज सेवा से गहरा जुड़ाव रहा।
उन्होंने भारत सरकार के साक्षरता मिशन के तहत गांव-गांव जाकर जिला संयोजिका के रूप में साक्षरता अभियान को आगे बढ़ाया।
विशेष रूप से उन्होंने अनपढ़ महिलाओं को कॉपी-किताब उपलब्ध कराकर शिक्षा के लिए प्रेरित किया। ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता और जागरूकता अभियान चलाया तथा महिलाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया।
उनके प्रयासों ने कई गांवों में शिक्षा के प्रति नई चेतना जगाई।
प्रशासनिक और संस्थागत जिम्मेदारियां
डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने कई महत्वपूर्ण संस्थागत पदों पर भी अपनी सेवाएं दी हैं वे संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा में सिंडिकेट सदस्य रहीं हैं। इसके साथ ही
ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में डायरेक्टर के पद पर भी सेवाएं दी हैं।इन जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्होंने शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राजनीति में प्रवेश और राज्यसभा तक का सफर
समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका जुड़ाव धीरे-धीरे राजनीति से भी हुआ।
फरवरी 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया।
इसके बाद वे निर्विरोध निर्वाचित हुईं और संसद के उच्च सदन में बिहार का प्रतिनिधित्व करने लगीं।
उनका राज्यसभा कार्यकाल 2024 से 2030 तक निर्धारित है।
संसद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
राज्यसभा सदस्य के रूप में डॉ. धर्मशीला गुप्ता कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों से जुड़ी हुई हैं—
• संसदीय राजभाषा समिति की सदस्य
• जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति की सदस्य
• महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति में सहभागिता
• संसदीय सलाहकार समिति की सदस्य
• आयुष मंत्रालय की सलाहकार समिति की सदस्य
इन समितियों के माध्यम से वे भाषा, जल प्रबंधन, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और सामाजिक नीतियों से जुड़े विषयों पर सक्रिय योगदान दे रही हैं।
समाज सेवा का सतत मिशन
डॉ. धर्मशीला गुप्ता विशेष रूप से इन क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं—
• ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार
• महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता
• सामाजिक जागरूकता अभियान
• किसानों और ग्रामीण जीवन के सुधार के प्रयास
उनका स्पष्ट मानना है—
“यदि शिक्षा मजबूत होगी तो समाज अपने आप मजबूत और समृद्ध बन जाएगा।”
डॉ. धर्मशीला गुप्ता सतत समाज सेवा की मिसाल बनकर देश की प्रगति में नया आयाम गढ़ने में जुटी हैं। उनका संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने का है।
डॉ. धर्मशीला गुप्ता की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि
यदि किसी व्यक्ति के पास शिक्षा, सेवा और समाज के प्रति समर्पण का संकल्प हो, तो वह छोटे से कस्बे से निकलकर भी देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंच सकता है।
आज मिथिला की यह बेटी संसद में बिहार की सशक्त आवाज बनकर उभर रही है। खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर यह बता रही है कि यदि हौसला मजबूत हो, तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता जरूर मिल जाता है।
thebigpist.com के मॉडरेटर vivek chandra से बातचीत में डॉ. धर्मशीला गुप्ता कहती हैं कि मुझे हर पहर वह प्रण याद रहता है जिसे मैंने शपथग्रहण के वक्त लिया था। मैंने शपथ लिया था कि
“मैं, डॉ धर्मशीला गुप्ता, ईश्वर की शपथ लेती हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगी, भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगी तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाली हूँ, उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूँगी।”
यह शपथ हर क्षण मुझे भारत के संविधान के गौरव और श्रद्धा को याद दिलाता रहता है। मैं इसे आत्मसात करते हुए यह कहती हूं कि अंतिम सांस तक मैं देश के आम आवाम की बेहतरी के लिए काम करती रहूंगी, देश की प्रभुता और अखंडता को बनाए रखते हुए जनसेवा करना हीं मेरा जीवन है, यही मेरा धर्म है और यही मेरा तीर्थ भी।



