छायांकन के महारथी: माइनस 60 डिग्री तापमान में  कैमरे के साथ डटे रहने वाले   “मागेश के” की कहानी 

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अंटार्कटिका के माईनस 60 डिग्री तापमान वाले  मुश्किल हालात हो, या फिर लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन।खेल के मैदान में गेंद की उछलकूद हो या फिर हॉकी स्टिक  का जोर , हर   बारिक दृश्यों को  चौकन्ने हो वो दूरदर्शन के कैमरे  में बखुबी उतार देते हैं। दृश्य भी एक से बढकर एक। टॉस के लिए हवा में उछाल सिक्का का क्लोजअप या फिर जीत के जोश में उछलते खिलाड़ी की खुशी ,या फिर नेट पर अचानक आ टपका बॉल ।  हर पहर खुद की चौकन्नी नजर को कैमरे की नजर बना दुनिया भर से , दुनिया भर के लिए ,सजीव तस्वीरें भेजते रहते हैं। इस मलाल के बिना कि दूसरों को नायक बनाने वाली यह नजर हमेशा कैमरे के पीछे ही रहती है। आज कहानी कैमरे को जीवन बना दुनिया भर के महत्वपूर्ण देशों में आयोजित कार्यक्रमों और खेलों को कैमरे में संजीदगी से कैद कर उसे जीवंत कर देने वाले दूरदर्शन के वरिष्ठ कैमरा पर्सन  ‘मागेश के’  की

अंटार्कटिका में कवरेज के दौरान
वो मेरे लिए चुनौती और रोमांचक से भरा पर था जब दूरदर्शन की और से मुझे अंटार्कटिका जाने के लिए कहा गया। उस समय कपिल  सिब्बल जी वहां दौरे पर जा रहे थे। मुझसे  पहले कई लोगों ने यहां जाने के लिए कुछ बहाने बना, इसे टाल दिया था। कारण वहां जाना काफी चुनौतीपूर्ण था। आपको माईनस 60 डिग्री सेल्सियस तापमान में रहना है ।वह भी कैमरे के साथ। हर और बस बर्फ ही बर्फ होगी। मैंने इस चुनौती को स्वीकार किया,  और वहां जाकर तमाम चुनौतियां के बीच तस्वीरें बनाई। इस यात्रा ने मुझे मन से मजबूत कर दिया। मुझमें प्रखरता भर दी। आज भी मैं 12 घंटे लगातार कैमरा कर सकता हूं। कहते हैं मागेश ।
   मागेश के  कृष्णाजी राव आज डीडी स्पोर्ट्स के सीनियर कैमरा पर्सन है। अब तक अपने कैमरे से देश -विदेश में आयोजित कई ओलंपिक खेलों को अपनी टीम के साथ कवर कर चुके हैं। खेल की दुनिया में छायांकन की हर बारिकियों में उन्हें महारत हासिल है। इसके साथ ही  स्वतंत्रता दिवस समारोह, जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा समेत कई अन्य महत्वपूर्ण इवेंट का भी छायांकन मागेश ने किया है।
 कैमरे के लिए डिजाइन किया अनोखा कवर
  मागेश के बताते हैं कि अंटार्कटिका में छायांकन के लिए कैमरे की बैटरी को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती थी। इतने कम तापमान पर बैटरी काम करती रहे इसके लिए मैंने काफी रिसर्च कर खुद से एक कवर डिजाइन किया। इसके लिए दिल्ली के स्थानीय बाजार से जाकर सामग्री खरीदी और उसे सिलवा कर तैयार किया। ईश्वर का शुक्रिया कि मेरा आइडिया एक दम काम कर गया। माइनस 60 डिग्री तापमान में मेरे कैमरे की बैटरी सुरक्षित थी।
लंदन हो या बीजिंग हर जगह मौजूदगी 
मागेश  एक खेल छायाकार के तौर पर दुनिया के कई देशों में अपने छायांकन का जादू बिखेर चुके हैं। वे बताते हैं कि मैंने एशियन गेम के लिए कतर में इवेंट कवर किया। चीन में ओलंपिक के दौरान बीजिंग में ओलंपिक गेम को कवर करने की मुझे जिम्मेदारी मिली और मैंने इसे कुशलतापूर्वक निभाया। इसके बाद चीन में फिर एशियन गेम को कवर किया। वह आगे बताते हैं कि मैंने लंदन में ओलंपिक को कवर किया। जहां- जहां दूरदर्शन की ओर से खेलों का कवरेज होता है वहां मेरी मौजूदगी होती है चाहे वह  रांची हो या फिर  लंदन। इसी प्रोफेशनल के कारण मैंने  खेल के साथ दुनिया को देखा, जाना और समझा है। इसका बड़ा श्रेय दूरदर्शन को जाता है।
अन्तर्राष्ट्रीय कार रैली  किया कवर
  मागेश  ने अनोखे कार रैली को भी कवर किया । यह कार रैली पांच देशों से होकर गुजरी थी। इसकी शुरुआत अरूणांचल प्रदेश से हुई थी। हम सड़क मार्ग से मणिपुर से म्यांमार होते हुए पांच देशों की यात्रा कर थाईलैंड पहुंची थी। इस कर रैली का कवरेज भी काफी यादगार रहा।
'पुरानी यादें '
ऐसा रहा बचपन का सफर 
    मागेश के बताते हैं कि मेरा जन्म कर्नाटक में   16.जुलाई.1969 को हुआ। बचपन कर्नाटक में ही बीता। वहीं बैंगलोर से मेरी पढ़ाई लिखाई भी हुई। मैंने     श्री जाया चमराजेंद्र (Govt ) पॉलिटेक्निक, बैंगलोर    से सिनेमेटोग्राफी  का कोर्स किया। यहां मैंने कैमरे और छायांकन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
कभी हीरों बनने की थी ख्वाहिश 
  मागेश यह भी बताते हैं कि मुझे युवा अवस्था में हीरो बनने की चाहत थी। मैं कैमरा के पीछे नहीं आगे काम करना चाहता था। इंस्टीट्यूट में नामांकन के बाद मुझसे कहा गया कि तुम्हें कैमरा सीखना है। दरअसल उस वक्त मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। हम सात भाई बहन हैं। बड़े होने के कारण मेरे उपर पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ भी था। पिताजी का बिजनेस था पर वह आमदनी परिवार के खर्च के लिए प्रयाप्त नहीं होता था। बहनों की शादी भी करनी थी। मुझे बताया गया कि कैमरा सीखने के बाद तुरंत नौकरी मिल जाएगी‌। फिर मैंने अपने नायक वाले सपने को वहीं छोड़, कैमरे के पीछे रहने का फैसला किया। आज मुझे अपने चुनाव पर गर्व है। इस काम ने मुझे प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास दोनों दिया है। मेरी पहली पोस्टिंग दूरदर्शन मेघालय में हुई थी। फिर गोवा और पिछले 7 साल से मैं डीडी स्पोर्ट्स में दिल्ली में कार्यरत हूं।
खेल छायांकन के दौरान
खेल छायांकन के दौरान मागेश
चुनौतिपूर्ण है खेल फोटोग्राफी 
    मागेश कहते हैं कि  खेल का  छायांकन काफी चुनौतीपूर्ण होता है। आप जो टीवी पर मैच देखते हैं इसके एक एक फ्रेम के लिए काफी मेहनत की जरूरत होती है। हमें हर पल चौकन्ना रहना होता है। की बार लंबे वक्त तक कंधे पर कैमरा रखना पड़ता है। उस दौरान पानी तक पीने का समय नहीं होता हमारे पास। ज्यादातर  घंटे आपको कैमरे पर खड़े रहना होता है। इन सब को मैं तनाव की तरह नहीं रोमांच की तरह लेता हूं।
अपने सहयोगी के साथ मागेश
अपने सहयोगी के साथ मागेश
 टीम को देते हैं हौसला 
हमें किसी भी मैच के दौरान कैमरे को सही पोजीशन पर व्यवस्थित करना होता है। उसके बाद शॉट के लिए सही लेंस का प्रयोग काफी अहम होता है। आपको गेंद की हर बारिकियों को स्पष्ट दिखाना होता है। अपने सहयोगियों को सही निर्देश देना भी जरूरी है। मैं अपने सहयोगियों के मनोबल को हमेशा बनाए रखता हूं। अभी बिहार में हम वॉलीबॉल कवर कर रहे हैं। यहां हमारी टीम में स्थानीय दूरदर्शन के छायाकार भी है जो काफी अच्छा प्रदर्शन खेल के कवरेज में कर रहे। इनके लिए यह नया अनुभव है। मैं अपने सहयोगियों के लिए हमेशा उनका दोस्त होता हूं। मैं  मानता हूं कि एक अच्छी टीम एक बेहतरीन कवरेज दे सकती है।
मिल चुके हैं कई सम्मान 
मागेश को बेहतर खेल छायांकन के लिए कई सम्मान मिल और प्रशस्ति-पत्र मिल चुके हैं। बैंगलोर में बने एक टेलिफिल्म के लिए भी मागेश को सम्मानित किया गया था।
परिवार के सदस्यों के साथ कुछ पल
परिवार के लिए नहीं मिल पाता समय

मेरा जीवन पूरी तरह से खेल छायांकन को ही समर्पित है। परिवार से मिलने का काफी कम वक्त मिल पाता है। हमें यह पता भी नहीं होता कि एक मैच खत्म होने के बाद फिर हमें दूसरे की शहर में जाना है। शुरू शुरू में बड़ा मुश्किल लगता था। पर अब सब ठीक है। परिवार के बीच बस कुछ मिनट फोन ही संवाद का माध्यम बनता है।परिवार में  पत्नी पूर्णिमा मागेश , बेटी भविष्यका , और बेटे देवेश का हमारे सहयोग और समर्थन मिलता रहता है। मैं इनसे दूर रहकर भी इनकी भावनाओं से करीब से जुडा होता हूं।

किताबें पढ़ने का शौक 
नागेश बताते हैं कि उन्हें किताबें पढ़ने का खुब शौक है। खास तौर से उपन्यास पढ़ना काफी अच्छा लगता है। पहले काफी किताबें पढा करते थे। अब वक्त काफी कम मिलता है पढ़ने के लिए। जब भी समय मिलता है मैं अपने इस शौक को पूरा कर लेता हूं।
भारत की जीत से मिलती है ऊर्जा
मैच के कवरेज के दौरान भारत या भारत के बाहर जब भी भारतीय मैच विजय होती है तो मन बड़ा आनंदित होता है। भारतीय टीम की जीत मन में उर्जा भर देती है।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को कवर करते मागेश
प्रधानमंत्री ने दिया माहौल
मंगेश कहते हैं की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने खेल को काफी बढ़ावा दिया है। इनकी कोशिशों से अब छोटे शहरों में भी खेलों का आयोजन हो रहा है। खेल के कवरेज का रेंज भी बढ़ा है। सरकार ने कई नई योजनाएं खेल के काम कर रही है। इससे एक अच्छा माहौल बना है खेलों का।
तमन्ना जीवन भर खेल के लिए रहूं समर्पित 
मागेश कहते हैं कि खेल पत्रकारिता और छायांकन में युवाओं के लिए प्राप्त अवसर है। आज भी क्षेत्र में लोगों की कमी है। हां जरूरी यह है कि इस क्षेत्र में आने वाले लोगों के पास धैर्य और एकाग्रता होनी चाहिए।
मैंने अपने जीवन का प्रमुख समय खेल छायांकन को दिया है। मैं रिटायर होने के बाद भी इससे जुड़ा रहना चाहता हूं। मैं अपने अनुभव और कौशल का प्रयोग नए छायाकारों को निखारने में करना चाहुंगा।
बहरहाल खेल की दुनिया आपको अनुशासन, आत्मविश्वास और जोश देती है।

“मुझे एक खेल छायाकार होने पर गर्व है, गर्व यह भी कि देश के राष्ट्रीय चैनल के साथ देश के लिए काम कर पा रहा हूं।”

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