मिलिए 3 फीट के डॉक्टर गणेश से, और इनके हौसले को भी सलाम कीजिए

कद महज तीन फीट,सपना

डॉक्टर बनने का,

मेडिकल कॉलेज ने मना कर दिया…
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी
कानूनी लड़ाई लड़ी
आज वह सफल डॉक्टर हैं।
आज की कहानी डॉ गणेश बरैया की….

प्रतिभा होने के बाद भी कई बार सामाजिक सोच और व्यवस्थाएं किसी व्यक्ति के सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन खड़ी हो जाती हैं।
तब ज्यादातर लोग हिम्मत खो देते हैं ।
ऐसी ही बाधाओं को तोड़कर ,
अपनी पहचान बनाने वाले शख्स हैं  डॉ. गणेश बरैया।डॉ गणेश बरैया का जन्म गुजरात के भावनगर जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ । जन्म से हीं संघर्षों ने दामन थाम लिया। पता चला कि
उन्हें ड्वार्फिज्म (बौनेपन) की समस्या है, जिसके कारण उनकी ऊंचाई केवल लगभग तीन फीट ही रह गई।,
स्कूल के दिनों में सहपाठी खूब चढ़ाते और रिश्तेदारों और अनजान लोगों से भी तानें सुनने पड़ते।

नहीं टूटने दिया आत्मविश्वास

इन परिस्थितियों के बाद भी उनके अंदर का आत्मविश्वास को टूटने की जगह मजबूत होता रहा । गणेश ने समझ लिया था कि अगर उन्हें समाज में अपनी पहचान बनानी है, तो पढ़ाई ही उनका सबसे बड़ा हथियार है।
सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में ध्यान देना शुरू किया। और देखा डॉक्टर बनने का सपना उनकी मेहनत रंग लाई जब उन्होंने NEET परीक्षा पास कर ली। यहां तक तो सब ठीक था पर संघर्ष अभी थमा नहीं था।

सपनों की दहलीज पर पहुंच लगा झटका

NEET पास करने के बाद जहां उनका सपना पूरा होने के करीब था, वहीं उन्हें मेडिकल कॉलेज में प्रवेश देने से मना कर दिया गया। कारण था उनकी शारीरिक स्थिति और कम ऊंचाई।
यह उनके लिए एक बड़ा झटका था। जिस लक्ष्य के लिए उन्होंने वर्षों तक मेहनत की, वह अचानक अधूरा नजर आने लगा।

 

लड़ी न्याय की लंबी लड़ाई

लेकिन गणेश ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी और न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को उसकी शारीरिक स्थिति के आधार पर उसके सपनों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बाद उन्हें MBBS में प्रवेश मिला।

मेडिकल कॉलेज की चुनौतियां भी अलग मुश्किल

मेडिकल कॉलेज का सफर भी आसान नहीं था। उपकरणों और सुविधाओं का उपयोग उनकी ऊंचाई के कारण कठिन था। कई बार उन्हें अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता था, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना धैर्य और दृढ़ता से किया।
धीरे-धीरे उनकी मेहनत और लगन ने सबका नजरिया बदल दिया।

आज समाज के लिए बने हैं प्रेरक

आज डॉ. गणेश बरैया एक सफल डॉक्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं और विशेष रूप से गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
उनकी कहानी यह बताती है की शारीरिक संरचना से बड़ी ताकत आपके खुद के आत्मविश्वास की है।

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