‘आकृति’ के ‘मंच पर कलाकारों ने बताया ‘ युद्ध’ नहीं ‘प्रेम’  है आदमी की जरूरत 

मुजफ्फरपुर, की सांस्कृतिक माटी पर एक बार फिर मनुष्यता को संजोये रखने की कोशिश ने आकार लिया है। यहां आपको अपने सपनों के चटख रंग मिलेंगे तो जिंदगी को जी लेने का हुनर भी। आंखें सुरमई बन आशाओं का पैमाना छलका चहक उठेगी। यह जादू हो रहा है मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय नाट्य मेला 3 में।

भावनाओं में गोता लगाते रहे दर्शक 

आकृति रंग संस्थान, मुजफ्फरपुर’ द्वारा आयोजित २७से३१ मार्च तक चलने वाले सांस्कृतिक आयोजन मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय नाट्य मेल का दूसरा दिन भी पहले दिन सा हीं उत्साह से सराबोर रहा।
चित्रकला प्रदर्शनी के साथ-साथ दो स्तरीय नाट्य प्रस्तुतियों में दर्शक भावनाओं में गोता लगाते रहे।

    तेतू और महारथी का मंचन 

इस अवसर पर मुजफ्फरपुर की संस्था ‘किलकारी’ द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘तेतू’ के साथ हीं गुलाबी नगरी जयपुर की नाट्य संस्था द्वारा मंचित ‘महारथी’ ने अपनी सशक्त विषयवस्तु और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से वर्तमान सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों को इंगित करते हुए मन को झकझोर दिया।

कला प्रेमियों की मानें तो यह आयोजन उत्तर बिहार के सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रहा। यह सब वैसे समय में जब दुनिया प्रेम की जगह युद्ध को अपना सर्वोच्च मान बैठी है।
यह आयोजन एक सकारात्मक संदेश दे रहा है कि इंसानियत को बचाना सबसे जरूरी है।

इस महत्वपूर्ण आयोजन की सफलता के पीछे ‘आकृति रंग संस्थान’ की पूरी टीम का समर्पण और प्रयास सराहनीय रहा।
बात उद्घाटन सत्र और इस उत्सव के पहले दिन की करें तो मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय नाट्य मेला – का उद्घाटन प्रसिद्ध आर्थोपेडिक सर्जन डॉ प्रवीण चंद्रा, वरीय शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण शाह, सीनेटर व नाट्य मेला के संयोजक डॉ संजय कुमार सुमन, पीजी हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ सुशांत कुमार, किलकारी मुजफ्फरपुर की प्रमंडलीय कार्यक्रम समन्वयक पूनम कुमारी, एसबीआई के पूर्व महाप्रबंधक अरुण कुमार, जिला स्कूल मुजफ्फरपुर के प्राचार्य विभू झा एवं आकृति रंग संस्थान के अध्यक्ष अशोक अंदाज ने दीप प्रज्वलित कर किया। वहीं कला विशेषज्ञ यशवंत पराशर ने नाट्य मेला के बारे में प्रारंभिक उद्बोधन किया।

इनका भी हुआ मंचन

आकृति रंग संस्थान के डाॅ सुनील फेकानिया के निर्देशन में ‘नट-बक्खो’ नाटक का जीवंत मंचन किया गया।

इस मौके पर स्वाधीन दास, वीरेन नंदा, डॉ रमेश ऋतंभर, कुमार विरल, ललन भगत, बैजू कुमार, अरविंद वरुण, पत्रकार प्रभात कुमार, सहायक प्राध्यापक डॉ अविनाश कुमार, विमल विश्वास, चित्रकार सुजीत कुमार, कामेश्वर प्रसाद, विनय, डॉ हेमनारायण विश्वकर्मा, कुंदन कुमार, नदीम खान, नृत्यांगना रंजना सरकार, सोनू सरकार, प्रमोद आजाद, सुमन वृक्ष, कुमार दिनेश समेत शहर के गणमान्य हस्तियां भी मौजूद रहीं

इस दौरान दिवंगत रंगकर्मी राॅबिन रंगकर्मी को भी याद करते हुए सबकी आंखें नम हो गई।

रंगमंच का यह उत्सव 31 मार्च तक जारी रहेगा।
तो आप में इस अनोखे उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं तो शाम 6.30 बजे आप सबका जिला स्कूल मैदान में में आइए और जीवंत बनाएं अपनी शाम

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