लाल ड्रेस, सफेद दाढ़ी और उड़ता हुआ रथ—सेंटा क्लॉज सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि बचपन की सबसे खूबसूरत भावना है। आज के बढ़ते एकाकीपन के दौर में हमारे अंदर छुपे ‘सेंटा’ की तलाश करता यह आलेख

ठंडी सर्द रात… खामोश आसमान… और दूर कहीं घंटियों की मधुर-सी आवाज़। बच्चों की आंखें नींद में होते हुए भी किसी अनकहे इंतज़ार में चमकती हैं। लाल रंग की पोशाक, सफेद घनी दाढ़ी, चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान, कंधे पर उपहारों की थैली और रेनडियरों द्वारा खींचा गया उड़ता हुआ रथ—सेंटा क्लॉज की यह छवि सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि बचपन की सबसे सुरक्षित और सुंदर भावना है। यह वह एहसास है, जिसमें डर नहीं, सिर्फ भरोसा है; जिसमें स्वार्थ नहीं, सिर्फ प्यार है।

संत निकोलस बने सेंटा
सेंटा क्लॉज का इतिहास चौथी सदी के संत निकोलस से जुड़ा माना जाता है। संत निकोलस अपनी दयालुता और जरूरतमंद बच्चों की गुप्त मदद के लिए प्रसिद्ध थे। वे बिना नाम बताए, बिना किसी अपेक्षा के, बच्चों और गरीब परिवारों के लिए उपहार और सहायता छोड़ जाया करते थे। समय के साथ यही निस्वार्थ भावना लोककथाओं में ढलती गई और संत निकोलस, सेंटा क्लॉज बन गए—एक ऐसा पात्र, जो देना जानता है, जताना नहीं।

लाल ड्रेस क्यों पहनते हैं सेंटा
समय बदला, देशों की सीमाएं बदलीं, लेकिन सेंटा का संदेश नहीं बदला। लाल ड्रेस गर्मजोशी और अपनापन है, सफेद दाढ़ी अनुभव और करुणा का प्रतीक है, और उड़ता हुआ रथ यह बताता है कि अच्छाई किसी दीवार या दूरी को नहीं मानती। रेनडियर उस सहयोग का प्रतीक हैं, जो खुशी की यात्रा में बिना थके साथ चलते हैं।

गिफ्ट में छुपी मुस्कान
सेंटा क्लॉज द्वारा गिफ्ट बांटना सिर्फ खिलौनों तक सीमित नहीं है। यह बच्चों के मन में यह विश्वास जगाता है कि उनकी अच्छाई देखी जाती है, कि कोई है जो उन्हें खास मानता है। सेंटा सिखाता है कि किसी को खुश करने के लिए बहुत बड़ा होना जरूरी नहीं—कभी-कभी एक छोटा-सा तोहफा या एक सच्ची मुस्कान किसी का पूरा बचपन रोशन कर सकती है।
सेंटा का बच्चों से प्रेम हमें यह याद दिलाता है कि बच्चे सिर्फ भविष्य नहीं, बल्कि हमारा वर्तमान भी हैं। उनकी मासूम हंसी, उनके सवाल और उनके सपने दुनिया को बेहतर बनाने की ताकत रखते हैं। आज जब बचपन मोबाइल स्क्रीन और प्रतिस्पर्धा के दबाव में सिमटता जा रहा है, सेंटा क्लॉज की कहानी हमें मानवीय मूल्यों की ओर लौटने का संदेश देती है।

अपने भीतर के सेंटा को जगा लें
सेंटा क्लॉज किसी एक धर्म या देश तक सीमित नहीं है। वह एक विचार है—बिना शर्त देने का, बच्चों को समझने का और उनकी आंखों में उम्मीद ज़िंदा रखने का।
अगर हर बड़ा अपने भीतर का थोड़ा-सा सेंटा जगा ले, तो शायद हर बच्चा यह महसूस कर सके कि दुनिया अब भी एक खूबसूरत और सुरक्षित जगह है।


