हमारी बदलती सोच , गैजेट, और बाजारवाद ने आजादी का मिजाज भी बदला है और उसका स्वरूप भी । 15 अगस्त पर पढ़िए कैसे बदल रहे हैं आजादी के मायने और उसकी भाषा….

रोज बढ़ती मंहगाई के वजन के बीच ‘बरिस्ता ‘ कॉफी हाउस के बाहर रील बनाता लड़का। कान में ईयर बर्ड खोंसे दफ्तर के गलियारे में Davidoff classic सिगरेट का धुंआ उड़ाती महिला। शहर के चौराहे पर हॉट पैंट पहने फेमिनिज्म का नारा बुलंद करती युवती। टीवी पर प्रसारित लाइव डिबेट में गुस्से से चिचियाता एंकर। बिना हेलमेट मोटरसाइकिल दौड़ाते दरोगा जी। सरकारी स्कूल की दरख़्त वाली दीवारों के बीच से दिखता चमाचम पब्लिक स्कूल। ट्राफिक की लाल -पीली बत्तियों के बीच सड़क पर ठहरी गाड़ियां की भीड़ के बीच हुटर बजा आगे निकलता नेताजी का काफिला। डीजे वाले बाबू की धुन पर चलती रेव पार्टी।। इंस्टाग्राम पर सितारा होटलों का दमकता ब्लॉग। खिलौनों को अलविदा कह मोबाइल पर वीडियो गेम में मशगूल नन्हा बच्चा। लंदन में पढ़ रहे बेटे का वीडियो काल। डायनिंग टेबल पर रखी ब्लैक वाटर की बोतल। ये नई आजादी की कुछ तस्वीरें हैं।

आज भी नहीं बदले वे हालात
आजादी की कुछ तस्वीरें बेहद स्याह है।
नामी अस्पताल में सारी रकम न जमा करने पर बंधक बना मरीज़ का शरीर। रोजगार गारंटी के नारों के बीच बेरोजगार युवक के आत्मा की टीस। कांट्रेक्ट की सरकारी नौकरी की तन्खवाह से घर का बजट चलाने की चिंता। काम के लिए रिश्वत की खुलकर डिमांड करते दफ्तर वाले बाबू। बाढ़ में हर साल डूबते मकान, दालान, लोग, मवेशी और सरकारी दावे। क़र्ज़ का बढ़ता बोझ। जनरल डब्बे में कोंचा कर दिल्ली जाने की मजबूरी। सच को झूठ और झूठ को सच साबित करने वाले लोग। ताखा पर पड़ा भोथार खुरपी-हंसुआ। ठहरी हुई नदियां और उनका का काला होता पानी। दादा जी बढ़ती की खांसी।
ये आजाद भारत देश की दो तस्वीरें हैं। एक और बढ़ते बाजारवाद और भ्रष्टाचार, झूठ की ताल पर कदमताल करते मस्त लोग हैं तो दूसरी ओर इनकी वेदना का शिकार जन मन।
जात और मजहब कै नाम पर
आज हम सब ने आजादी की नई भाषा और परिभाषा गढ़ ली है। जाति और मजहब के नाम पर संकीर्णता की दीवारें खुब मजबूत होती जा रही है। राजनीति पूंजी लगाने और कमाने का धंधा बनता जा रहा। लोकतंत्र के स्तंभों पर प्रश्न चिन्ह लग रहा। चुनावी बयार में नेताओं के उड़नखटोला वाले आसमानी दौरा और बेशुमार धन ख़र्च लोकतंत्र का नया ट्रेंड है। जनता को भी कमो बेस राजनीति का तिकड़म और तिकड़म की राजनीति हीं अब भाने लगी है। सत्यमेव जयते वाले भारत मे सत्य को असत्य पटखनी दे बैठा है।
24 घंटे शॉपिंग की आजादी
बाजार ने भी आजादी की नई परिभाषा लोगों को थमा दी है। अब आनलाइन मोबाइल पर हर पल खरिदारी करने की आजादी है। ब्रांड वैल्यू बनाने की आजादी है। बेडरूम से लेकर दफ्तर तक में चौबिसों घंटे बाजार आपकी सेवा में जुटा है बस मोबाइल स्क्रीन पर उंगलियां फेरिए और सामान आपके पते पर। पूंजीवाद जनहित और आजादी का मुखौटा पहन आज सामने है।

झटपट प्यार और ब्रेकअप की आजादी
इन सब के साथ ही रिश्तों ने भी आजादी के नये मानक गढ़े हैं। फैमली न्यूक्लियर हो गई है। युवा बंधन मुक्त लीव इन का रास्ता पसंद कर रहे। इश्क- विश्क वाले ट्रेडी युवाओं के लिए प्यार और ब्रेक अप झट पट वाली चीज हो गई है। दर्जनों डेटिंग साइट आज मौजूद हैं। आज सोशल मीडिया पर इश्क के इजहार के लिए दिल के साथ ILove u वाली इमोजी काफी है और ब्रेकअप के लिए भी इमोजी है। आज जहानाबाद के किसी सुदूर गांव में रह रहा रामपाल बैंगलोर के रजनी से दिल लगाने की आज़ादी गैजेट्स ने दी है। रेडी टू ईट के जमाने ने भारतीय खीर पुड़ी की जगह नुडल पास्ता को कीचेन का सरताज बना दिया है। जोमैटो और स्वीगी जैसे ऐप ने महिलाओं को चुल्हे से भी आजादी दी है। चुल्हा जलाने की जगह मोबाइल चला आर्डर करना आसान लगने लगा है।
AI वाली आजादी
एआई के जमाने ने अब हमें याद रखने और खुब दिमाग चलाने से भी आजादी मिल रही। बस पर भर में आप ज्ञानी बन जाते हैं। जब जिस चीज की जरूरत हो वह सब एआई से उपलब्ध है।
कुल मिलाकर बदलाव के इस दौर में आजादी के नए मायनों को लेकर देश का लोकतंत्र बदलाव की ओर है।

तमाम विसंगतियों के बावजूद उसने बचाए रखी है उम्मीद । जिसे दिल में भर वो ‘काबुलीवाला ‘ का वह गीत गुनगुनाता लेता है ‘ऐ मेरे प्यारे वतन तुझ पे दिल कुर्बान…..’


