डायन प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने वाली छुटनी देवी की कहानी

यह कहानी झारखंड के उस महिला के हौसलों की कहानी है जिसे कभी डायन कह कर प्रताड़ित किया गया। आज वह न सिर्फ डायन प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रही हैं बल्कि महिलाओं को मुखर होने का स्वर भी दे रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पढ़िए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित छुटनी महतो उर्फ छुटनी देवी की यह हिम्मती कहानी…

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में अवस्थित है। बीरबांस गांव । अत्यंत साधारण से इसी गांव में रहती है असाधारण हौसलों की धनी छुटनी देवी । छुटनी देवी ने डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ अपनी जिंदगी लगा दी और लाया समाज में बदलाव।

दर्द भरा संघर्ष और जागरूकता की शुरुआत

बात साल 1995 की है, जब छुटनी देवी को उनके ससुराल वालों ने डायन करार देकर प्रताड़ित किया। इतना ही नहीं उन्हें गांव से बाहर निकाल दिया गया। इस वक्त छुटनी देवी को काफी शारीरिक और मानसिक यातनाएं सहनी पड़ीं, यहां तक कि उन्हें मैला तक खिलाया गया। इन अत्याचारों के बाद, वह अपने मायके में आ गई । और लिया संकल्प अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का ।

डायन प्रथा के खिलाफ अभियान

अपने अनुभवों से प्रेरित होकर, छुटनी देवी ने डायन प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का बीड़ा उठाया। यह सब आसान न था पर जहां मन में मजबूत संकल्प हो वहां बाधाएं भी रास्ते से दूर हो जाती है। वो गांव में इस प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने लगी। धीरे धीरे लोगों में जागरूकता आई।
उन्होंने ‘आशा’ नामक गैर-सरकारी संगठन के साथ मिलकर एक पुनर्वास केंद्र की स्थापना भी की है ।जहां वे डायन प्रथा से पीड़ित महिलाओं को सहायता और समर्थन प्रदान करती हैं। अब तक, वे 62 से अधिक महिलाओं को इस कुप्रथा से मुक्त करा चुकी हैं ।

और मिला पद्मश्री पुरस्कार

एक वक्त ऐसा आया जब सरकार तक छुटनी देवी के मुहिम की बात पहुंची ।
झारखंड सरकार ने भी डायन प्रथा उन्मूलन के लिए ‘गरिमा परियोजना’ शुरू की है, जिसमें छुटनी देवी जैसी समाजसेवियों का महत्वपूर्ण योगदान है। छुटनी देवी को उनकी अथक सेवाओं के लिए, उन्हें 2021 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया, जो उनकी प्रतिबद्धता और साहस का प्रतीक है।

छुटनी देवी का जीवन हमें सिखाता है कि व्यक्तिगत पीड़ा को सामाजिक परिवर्तन के माध्यम में कैसे बदला जा सकता है। उनकी कहानी न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है, जो हमें अंधविश्वास और कुप्रथाओं के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देती है।

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