डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की इन कहानियों में है जिंदगी की सीख

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन संघर्ष, प्रेरणा और विनम्रता की मिसाल है। वे केवल एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि एक सच्चे नेता और महान इंसान भी थे। उनके जीवन की कई कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि असली सफलता दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ने में है। आइए, उनकी कुछ ऐसी अनसुनी कहानियों को जानते हैं, जो हमें जीवन की सीख देती है

जब कलाम साहब ने साधारण कर्मचारी को सम्मान दिया
एक बार डॉ. कलाम एक विज्ञान सम्मेलन में आमंत्रित थे। उनके साथ राष्ट्रपति भवन के कुछ कर्मचारी भी गए थे। सम्मेलन के बाद जब भोज का आयोजन हुआ, तो कर्मचारियों को अलग बैठाने की व्यवस्था की गई।

कलाम साहब ने जब यह देखा तो आयोजकों से पूछा, “क्या ये मेरे साथ दिन-रात मेहनत नहीं करते? क्या ये मेरी टीम का हिस्सा नहीं हैं?” आयोजकों के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “अगर ये मेरे साथ नहीं बैठ सकते, तो मैं भी यहाँ नहीं खाऊँगा।”

आखिरकार, कर्मचारियों को भी मुख्य हॉल में बुलाया गया, और डॉ. कलाम ने उनके साथ भोजन कर यह संदेश दिया कि सच्चे नेता को अपने साथियों का सम्मान करना चाहिए।

जब एक बच्चे के सवाल ने बदल दी उनकी सोच

एक बार डॉ. कलाम एक स्कूल में बच्चों से बातचीत कर रहे थे। वे बच्चों को सपने देखने और बड़े लक्ष्य रखने के लिए प्रेरित कर रहे थे। तभी एक छोटे बच्चे ने हाथ उठाकर सवाल किया, “सर, आप राष्ट्रपति बनकर क्या कर रहे हैं?”

यह सुनकर डॉ. कलाम कुछ क्षण के लिए चुप हो गए। फिर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

“मैं यहाँ तुम्हारे जैसे बच्चों से बात कर रहा हूँ, ताकि तुम बड़े होकर देश के भविष्य को उज्ज्वल बना सको।”

बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उस मासूम सवाल ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि एक राष्ट्रपति के रूप में वे किस तरह देश के युवाओं के लिए अधिक योगदान दे सकते हैं।

जब उन्होंने वैज्ञानिक की गलती को अपनी गलती बना लिया

डॉ. कलाम जब इसरो में कार्यरत थे, तब उन्हें एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई। उनकी टीम के एक वैज्ञानिक से एक गंभीर गलती हो गई, जिससे परियोजना असफल हो सकती थी। जब इस बारे में अधिकारियों को बताया गया, तो सभी वैज्ञानिक डरे हुए थे कि कहीं उन्हें सज़ा न मिल जाए।

लेकिन डॉ. कलाम ने आगे बढ़कर कहा, “गलती मेरी थी, क्योंकि मैं टीम लीडर हूँ। मैंने उनकी निगरानी में चूक की।”

उनकी इस ईमानदारी ने न केवल उनकी टीम का मनोबल बढ़ाया, बल्कि भविष्य में सभी वैज्ञानिकों को अधिक सतर्कता से काम करने की प्रेरणा भी दी।

जब उन्होंने गार्ड की ड्यूटी को समझा

राष्ट्रपति बनने के बाद भी डॉ. कलाम का दिल आम लोगों के लिए धड़कता था। एक बार वे एक कार्यक्रम में देर रात तक व्यस्त रहे। जब वे बाहर आए तो उन्होंने देखा कि सुरक्षा गार्ड सुबह से बिना आराम किए ड्यूटी पर खड़ा था।

कलाम साहब ने तुरंत गार्ड से कहा, “तुम सुबह से ड्यूटी पर हो, अब तुम्हें आराम करना चाहिए।” और उन्होंने खुद गार्ड की कुर्सी पर बैठने की पेशकश कर दी। गार्ड अवाक रह गया और बोला, “सर, यह मेरी ड्यूटी है!”

कलाम साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “देश के लिए काम करना मेरी भी ड्यूटी है, लेकिन इंसानियत सबसे बड़ी ड्यूटी है।”

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम केवल एक महान वैज्ञानिक नहीं, बल्कि विनम्रता, करुणा और नेतृत्व के प्रतीक थे। उन्होंने हमें सिखाया कि असली सफलता केवल ऊँचाइयों को छूने में नहीं, बल्कि दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ने में है। उनकी ये  कहानियाँ हमें यह याद दिलाती हैं कि सच्चा नेतृत्व वही है जो दूसरों को प्रेरित करे और हर व्यक्ति को समानता का दर्जा दे।

सपने वो नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।” – डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

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