खेती करने वाली साधारण महिला कैसे बन गई ‘मिलेट क्वीन’, खास है संघर्ष की यह कहानी

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रानियों का जिक्र होता है तो साम्राज्यों की कई रानियों का नाम जेहन में आ जाता होगा. जैसे रानी पद्मिनी. रानी कमलावती. रानी लक्ष्मीबाई. रानी गायत्री देवी. आदि-आदि. ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया भी. लेकिन क्या आप क्वीन ऑफ मिलेट को जानते हैं? नहीं.. तो इनका परिचय जान लीजिए. एक आदिवासी किसान रायमती देवी घुरिया को मिलेट क्वीन के नाम से जानते हैं.

क्यों उन्हें यह तमगा मिला और क्या है उनके मिलेट क्वीन बनने की कहानी, इस रिपोर्ट में विस्तार से जानेंगे.

धान और मिलेट की फसल को सहेजा

ओडिशा के कोरापुट जिले की एक आदिवासी परिवार में जन्मी रायमती देवी घुरिया साधारण महिला ही हैं. लेकिन खेती के प्रति उनके जुड़ाव ने उन्हें खास बना दिया. बचपन से ही वह खेती और अलग अलग किस्म के पैदावारों को लेकर बेहद उत्सुक रहती थीं. पद्म श्री पुरस्कार विजेता कमला पुजारी से उन्हें खूब प्रेरणा मिली. रायमती देवी ने पुजारी जी से फसलों को संरक्षित करने और सहेजने के तौर-तरीके सीखे. और इस तरह से उन्होंने धान की 72 पारंपरिक किस्मों और मिलेट की कम से कम 30 किस्मों को संरक्षित किया है. जिनमें कुंद्रा, बाटी, मंडिया, जसरा, जुआना और जामकोली जैसी दुर्लभ किस्में शामिल हैं.

रायमती कहती हैं,

“मुझे स्कूल की कोई भी शिक्षा याद नहीं है, मैं केवल मिलेट का संरक्षण और उगाना जानती हूं, जो मैंने खेतों पर सीखा था.”

16 साल की छोटी उम्र में शादी होने के बाद रायमती देवी का जीवन घर के काम में ही उलझ कर रह गया था. बावजूद इसके उन्होंने अपने आप को खेती से कभी दूर नहीं किया. देसी फसलों की खेती से उन्हें विशेष लगाव था. उन्होंने अपने आस-पास के किसानों के साथ मिलकर मिलेट की किस्मों को संरक्षित करना शुरू किया.

सैकड़ों किसानों को दे चुकी हैं प्रशिक्षण

अपने काम के लिए वह चेन्नई स्थित एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ) नाम की संस्था से जुड़ीं, जहां उन्होंने आधुनिक संरक्षण का कौशल सीखा. धीरे-धीरे उन्होंने गांव की महिलाओं को ट्रैनिंग देना शुरू किया. वह अब तक लगभग 2,500 किसानों को मिलेट की खेती का प्रशिक्षण दे चुकी हैं. रायमती ने न सिर्फ इसकी खेती पर जोर दिया, बल्कि महिलाओं को मिलेट का इस्तेमाल करके पकोड़े और लड्डू जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर स्थानीय बाजार में बेचने के लिए भी प्रेरित किया.

जी-20 शिखर सम्मेलन में मिला न्योता

उन्होंने इस काम के लिए अपने गाँव में एक फार्म स्कूल भी बनवाया है. यह रायमती के प्रयास ही है, जिसके कारण आज वह अपने गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई हैं. दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में भी रायमती देवी को आमंत्रित किया गया था. उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है. रायमती और उनके प्रयास देश में खेती के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं.

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