माइलस्टोन

बिना दवा हर दर्द होगा छूमंतर, लालू से लेकर पंकज त्रिपाठी तक इस युवा डॉक्टर के मुरीद

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है ?
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है ?
यह मिर्जा गालिब का मशहूर शेर है।आज जहां इलाज एंटिबायोटिक्स पर आधारित हो चला है। मर्ज ठीक करने की दवाएं दूसरा मर्ज पैदा कर जाती है। वही बिहार के एक युवा डॉक्टर रजनीश देश को बिना एंटिबायोटिक्स और सर्जरी के स्वास्थ्य बनाने की अनोखी पहल में जुटे हैं। इनकी लोकप्रियता का आलम यह की राजनीति के धुरंधर से लेकर वालीवुड के चमकते सितारों तक की बिगड़ी सेहत दुरूस्त कर चुके हैं।
जरूर पढ़िए काइरोप्रैक्टिक के जरिए बिना दवा बिना सर्जरी इलाज करने वाले डॉक्टर रजनीश की यह कहानी…

देखिए इन दिनों इलाज में जिस तरह से दवाओं और एंटिबायोटिक्स का दखल बढ़ता जा रहा है। इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। आप एक बीमारी को ठीक करने की दवा खाते हैं तो वह जाने- अनजाने आपके शरीर में दूसरी बीमारी को दाखिला दिला देता है जिसे हम साइड इफेक्ट्स कहते हैं । सर्जरी के बाद भी आपको काफी दवाओं की जरूरत होती है। एंटिबायोटिक्स के हम इतने आदी हो गए हैं कि अब यह कई बीमारियों पर काम ही नहीं करती। ऐसे में मौत के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं कहते हैं डॉक्टर रजनीश ।

वे आगे कहते हैं कि मेडिकल जर्नल, ‘द लैंसेट’ के अनुसार, 2019 में इस तरह के प्रतिरोध से दुनिया भर में सीधे तौर पर 12 लाख 70 हजार मौतें हुईं। भारत में भी हालत बहुत बेहतर नहीं कही जा सकती। ऐसे में हमें अपनी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की और लौटना होगा जहां दवाओं पर निर्भरता न हो। मैं ऐसी ही पद्धति पर कार्य करता हूं। विज्ञान की भाषा में इसे काइरोप्रेक्टिक तकनीक कहते हैं। इस चिकित्सा पद्धति में हम बिना दवाई के मरीज का इलाज करते हैं और वह बीमारी से निजात पा जाता है।,

बिना दवा ऐसे होती है बीमारी छू मंतर

डॉक्टर रजनीश बताते हैं कि काइरोप्रेक्टिक तकनीक पूरी तरह से मैनुअल होती है। इसमें रीढ़ की हड्डी को हाथों से दबाकर रोग ठीक किया जाता है। वे आगे बताते हैं कि यह भारत की प्राचीन पद्धति रही है । धीरे- धीरे यह भारत से गुम होती गई कनाडा , यूएस जैसे देशों ने इसको विकसित किया। वें कहते हैं कि जिन लोगों का जुड़ाव गांव से होगा वे जानते होंगे कि पहले गांव में नस बैठाते थे । आप काइरोप्रेक्टिक को इसका अपग्रेड वर्जन मान सकते हैं।

इन बीमारियों में है राम बाण

डॉक्टर रजनीश के अनुसार काइरोप्रेक्टिक तकनीक आपको पूर्ण स्वस्थ बनाने में मदद करता है क्योंकि यह रक्त संचार को व्यवस्थित करता है। वैसे स्पाइन से जुड़ी कोई भी समस्या, दर्द, लो बैक पेन, सर दर्द, माइग्रेन, गर्दन में ऐंठन या दर्द होना, जैसी बीमारियों में यह मैथर्ड राम बाण साबित होता है। दूसरी पद्धति से इन बीमारियों का इलाज कर थक चुके लोग हमारे पास आते हैं और पूरी तरह से ठीक होकर जाते हैं। अब तक हमने लगभग 50 हजार लोगों का बिना दवा बिना सर्जरी सफल इलाज किया है और वे पूरी तरह से ठीक हो सामान्य जीवन में लौट आए हैं। डॉक्टर रजनीश आगे कहते हैं डिप्रेशन जैसी समस्या में भी इससे काफी सुधार होता है हम नेक मसल का एलाइनमेंट मिलाते हैं इससे रक्त प्रवाह ठीक होता है और यह मूड़ को खुशहाल रखता है।

राजनेता और फिल्मी सितारे मुरीद

आम लोगों के साथ खास लोग भी डॉक्टर रजनीश के इलाज के मुरीद हैं। राजनीति के दिग्गज लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, उनके पुत्र और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह, सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद का इलाज इस पद्धति से कर चुके हैं। इसके साथ ही मशहूर फिल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी और भोजपुरी फिल्म ऐक्ट्रेस काजल राघवानी और खेसारी लाल की चिकित्सा कर उन्हें ठीक कर चुके हैं। इसके साथ ही साउथ के कई फिल्मी कलाकार भी डॉक्टर रजनीश से इलाज करवा चुके हैं।

गरीबों के लिए फ्री चेकअप

डॉ रजनीश कहते हैं कि मैंने ग़रीबी को काफी नजदीक से देखा है। इस लिए मैं हर माह पहले सप्ताह में 100 लोगों का निशुल्क इलाज करता हूं। इसके साथ ही सेना और पुलिस के जवानों के बीच जाकर फ्री कैंप लगा कर मैं उनका भी निःशुल्क इलाज करता हूं।

दुनिया भर में धूम

डॉक्टर रजनीश के इस अनोखी चिकित्सा की धूम देश ही नहीं विदेशों में भी है। भारत में वे पटना के साथ- साथ बैंगलोर के साथ ही दुनिया के की देशों में समय- समय पर इस थैरेपी से इलाज और परामर्श देने हेतू जाया करते हैं। काइरोप्रैक्टिक थेरेपी पर हुई कई महत्वपूर्ण सेमिनारों में डॉ रजनीश ने अपने खास रिसर्च पर व्याख्यान दिया है।

गरीबी से लड़ कर बीता बचपन

डॉ रजनीश बताते हैं कि उनका बचपन ग़रीब से दो- दो हाथ करते हुए बीता। जन्म बिहार के एक छोटे से कस्बाई शहर आरा में हुआ। पिता एक साधारण किसान थे, खेतों का रकबा काफी कम था। पिताजी परिवार का लालन- पालन करने के लिए राजमिस्त्री का काम भी किया करते थे। इन सब के बाद भी अच्छी आमदनी नहीं हो पाती। शुरूआती पढ़ाई मेरी आरा के स्कूल में ही हुई फिर मैट्रिक के समय मुझे पढ़ने के लिए अपने मामा जी के यहां पटना भेज दिया गया।

मैंने पटना में रह कर बोर्ड का एग्जाम दिया और फिर पटना से ही फीजियोथेरेपी की पढ़ाई की। फिर ओस्टियोपैथ कनाडा से किया। काइरोप्रेक्टिक पर मैंने दुनिया भर में वर्कशॉप अटेंड किए। मैं इस विधा को गहराई तक समझना चाहता हूं और हमेशा नई जानकारियों से खुद को अपडेट रखना चाहता हूं। यही वजह है कि मैं स्वीडन से काइरोप्रेक्टिक में मास्टर डिप्लोमा कर रहा हूं।

माता- पिता ने बढ़ाया हौसला

डॉक्टर रजनीश बताते हैं कि मेरे पिताजी साधारण किसान थे पर उनकी सोच असाधारण थी। उन्होंने कभी भी अपने विचार मुझ पर थोपा नहीं। मुझे पढ़ने की आजादी दी। खुद दुख सहकर भी मुझे आगे बढ़ाया। वे कहते हैं मेरी मां वैसे तो एक घरेलू महिला है पर जीवन की कला उनमें भरी हुई है। मां ने मुझे हमेशा आशावादी बनें रहने की कला बचपन से ही सीखाई। मेरी प्रगति के सफर में यह सबसे मजबूत सीख दी।

पत्नी डॉ ज्योति ने किया अंधेरे वक्त को रोशन

डॉ रजनीश कहते हैं कि एक कहावत है पुरुष की प्रगति में महिला का हाथ होता है। मेरे पर यह कहावत सटीक बैठती है। मेरी कामयाबी का एक बड़ा श्रेय मेरी पत्नी डॉक्टर कुमारी ज्योति को जाता है। संघर्ष के दिनों में वो न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाती रही बल्कि ढाल बनकर खड़ी रही। हमने मिलकर जीवन के अंधेरे वक्त को भी रौशन कर दिया। वे बताते हैं कि पत्नी ज्योति भी नैचुरोपैथी की डॉक्टर और डाइटिशियन है। दोनों ने 2016 में प्रेम विवाह किया था।

इनसे है परिवार की रौनक

अपने परिवार के बारे में डॉ रजनीश बताते हैं कि परिवार में 5 साल की बेटी ज्योत्सना कांत और 3 साल का बेटा सत्यराज ज्योतिकान्त भी शामिल है। इन बच्चों से परिवार में हर वक्त रौनक रहती है। बाहर से तक कर आने के बाद बच्चों के संग कुछ वक्त बिताने पर सारी थकान गुम हो जाती है। इन नन्हें बच्चों से हमेशा उर्जा मिलती रहती है।

वर्ल्ड क्लास इंस्टिट्यूट खोलने की योजना

डॉ रजनीश अपने इस हुनर को भारत के हर गांव मुहल्ले तक पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए वो एक वर्ल्ड क्लास
इंस्टिट्यूट खोलने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। इस इंस्टिट्यूट में युवाओं को काइरोप्रैक्टिक के बारे में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वे कहते हैं कि इससे भारत में एक अनोखी क्रांति आएगी। यह क्रांति होगी स्वस्थ और सबल भारत को बनाने का और दवा पर निर्भरता खत्म करने का।

बहरहाल डॉ रजनीश बिना दवा दुनिया को सेहतमंद बनाने के अपने संकल्प पर अपने मजबूत कदम बढ़ा रहे हैं। अगर आप या आपके कोई परिजन जोड़ों के दर्द से परेशान हो तो एक बार डॉ रजनीश से परामर्श जरूर लें।

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विवेक चंद्र
उम्मीदों के तानों पर जीवन रस के साज बजे आंखों भींगी हो, नम हो पर मन में पूरा आकाश बसे..
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