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यह कहानी भारत में जन्मे और पली-बढ़ी श्रेया सूरज की है। श्रेया वैसे तो गणित की शिक्षिका है पर इनके अंदर एक कलाकार का दिल धड़कता है। वैसा कलाकार जो प्रकृति की खूबसूरती को बचाने और संवारने में जुटा है। श्रेया समुद्र तटों की सफाई करती हैं। समुद्र के कचरे को इकट्ठा करती है और फिर अपने कलाकारी के हुनर से उसे रीसाइक्लिंग कर दोबारा प्रयोग के काबिल बना देती हैं। श्रेया ने अब तक कतर के 150 से अधिक समुद्र तटों के सफाई अभियान में हिस्सा लिया है। आईए इस प्रकृति प्रेमी कलाकार की कहानी जानते हैं

मेरा जन्म चेन्नई में हुआ कोलकाता में पली-बढ़ी और आज कतर में गणित की शिक्षिका हूं। मेरे मन में बचपन से ही प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा रही है। यह प्रकृति की तो है जो हमें जीवन देती है, और हमें चलना और बढ़ना सिखाती है। कतर समुद्र के किनारे बसा है समंदर के कारण बसे होने यहां की ख़ूबसूरती भी निखर उठती है, इसका दूसरा पक्ष बेहद ही स्याह है। आपको समुद्र तटों पर कचरे के ढेर दिखेंगे। लोग यहां समंदर के किनारे वक्त बिताने आते हैं और प्लास्टिक, चिप्स की पैकटे, और ढेर सारा कचरा छोड़ कर चले जाते हैं। यह सब समंदर के लिए ही हानिकारक नहीं उस में रह रहे जलीय जीवो के लिए भी काफी खतरनाक है। मैंने सोचा कि क्यों ना प्रकृति को संवारने की पहल की जाए। लोगों को जागरूक किया जाए। इसके लिए मेरे कलाकार मन ने सबसे पहले मेरा साथ दिया।

मन के कलाकार को जिंदा रखने की जरूरत

मुझे लगता है कि प्रकृति की खूबसूरती बचाने के लिए मन की खूबसूरती को बचाना भी जरूरी है आपको अपने मन के कलाकार को जिंदा रखने की जरूरत है। इसको लेकर फेसबुक पर एनी बडी कैन ड्रा नामक कला समूह का गठन किया। मेरा मानना है कि हर इंसान के अंदर एक कलाकार छुपा बैठा होता है जरूरत उसे जगाने की है।

कार्यशालाओं का करतीं हैं आयोजन

श्रेया आगे कहती हैं कि मैं बच्चों और वयस्कों के लिए कला कार्यशाला का आयोजन करती हूं ।जिसमें बेकार फेंक दी गई प्लास्टिक सीसा, कागज की वस्तुओं को रिसाइकल कर उन्हें खूबसूरत बना पुनः उपयोग में लाने के लिए तैयार किया जाता है। इससे जहां बेकार की वस्तुएं उपयोगी बन रही है वही लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता भी आती है।

समुद्री तटों की सफाई और वृक्षारोपण का कार्य भी

श्रेया आगे बताती है कि इन सबके साथ ही वो समुद्री तटों की सफाई और वहां वृक्षारोपण का कार्य भी कर रही हैं। वह कतर के कई पर्यावरण संरक्षण संगठन की सदस्य भी हैं।

150 से अधिक समुद्र तटों की कर चुकी है सफाई

the post.com से बात करते हुए श्रेया बताती है कि वह कई समूहों के साथ मिलकर पिछले 4 साल में150 से अधिक समुद्र तटों की सफाई और वहां वृक्षारोपण का कार्य कर चुकी है। ऐसा करने से पर्यावरण तो सुंदर होता ही है साथ ही मानसिक शांति भी मिलती है। वह कहती है कि प्रकृति है तो ही जीवन है ।हमें जीवन को बचाने के लिए पहले प्रकृति को बचाना और संवारना होगा।

कोरोना काल में अकेले निकल पड़ी सफाई अभियान पर

श्रेया का कहना है कि कोरोना के 6 महीनों में, कोरोना प्रतिबंधों के कारण समुद्र तट पर अकेले जा सफाई का कार्य मैनै किया। सभी समुद्र तटों में कूड़े की मात्रा को देखना बहुत निराशाजनक होता है.

बच्चों से मिलता है हौसला

श्रेया बताती है कि मेरे बच्चे हमेशा मेरी सफाई अभियान के दौरान मुझे हौसला देते हैं। वें कई बार मेरे साथ भी आते हैं। हम अपने घर में पानी, बिजली, भोजन और संसाधनों की बर्बादी को कम करने का प्रयास करते हैं।


नई पीढ़ी के लिए बनाए खूबसूरत पृथ्वी

वह यह भी कहती हैं कि केवल एक पृथ्वी है जहां इंसानों का वास है। हम सभी को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने की पहल करनी चाहिए। प्लास्टिक जैसे पदार्थ के पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

बिना किसी अपेक्षा के दूसरों का भला करो

श्रेया कहती है कि जीवन में मेरा सिद्धांत है – बिना शर्त और बिना किसी अपेक्षा के दूसरों का भला करो। अगर आपका काम अच्छा है तो प्रकृति आपको इनाम जरूर देगी


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विवेक चंद्र

उम्मीदों के तानों पर जीवन रस के साज बजे आंखों भींगी हो, नम हो पर मन में पूरा आकाश बसे..